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Safe Delivery : अस्पतालों में बढ़े सुरक्षित प्रसव, लेकिन निजी अस्पतालों में बढ़ता सी-सेक्शन बना चिंता

By Newsdesk Admin
19/07/2026
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Safe Delivery
Safe Delivery

सीजी भास्कर, 19 जुलाई : छत्तीसगढ़ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (Safe Delivery) के मोर्चे पर राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में संस्थागत प्रसव (Safe Delivery) का प्रतिशत बढ़कर 86.9 फीसदी पहुंच गया है। हालांकि रिपोर्ट में निजी अस्पतालों में बढ़ रहे सी-सेक्शन (C-Section) प्रसव को लेकर गंभीर चिंता भी जताई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आवश्यकता से अधिक ऑपरेशन के जरिए प्रसव भविष्य में मां और नवजात, दोनों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।

Contents
    • निजी अस्पतालों में बढ़ा सी-सेक्शन का ट्रेंड
    • राष्ट्रीय औसत से अभी भी पीछे प्रदेश
  • Safe Delivery जिलों के बीच बड़ा अंतर
    • Safe Delivery विशेष अभियान चलाने की सलाह
    • सी-सेक्शन मामलों की होगी निगरानी

The C-Section Surge in India: Uncovering the Impact of Profit on Childbirth

रिपोर्ट के अनुसार (Safe Delivery)  प्रदेश में सुरक्षित प्रसव की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन राष्ट्रीय औसत की तुलना में छत्तीसगढ़ अभी भी पीछे है। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से अधिक महिलाएं अस्पतालों में प्रसव करा रही हैं, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh Health) में शहरी क्षेत्रों में अस्पतालों में प्रसव का प्रतिशत 94.6 फीसदी दर्ज किया गया है। यह दर्शाता है कि शहरों में स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता का बेहतर असर देखने को मिल रहा है। वहीं ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में भी स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन वहां अभी भी स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत बनी हुई है।

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निजी अस्पतालों में बढ़ा सी-सेक्शन का ट्रेंड

रिपोर्ट के मुताबिक निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन (C-Section) से होने वाली डिलीवरी का प्रतिशत 64.9 फीसदी तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में चिकित्सकीय आवश्यकता होती है, लेकिन अनावश्यक ऑपरेशन से बचना भी जरूरी है। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं।

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राष्ट्रीय औसत से अभी भी पीछे प्रदेश

एनएफएचएस-5 में छत्तीसगढ़ में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 85.7 फीसदी था, जो अब बढ़कर 86.9 फीसदी हो गया है। यानी इस बार केवल 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। हालांकि राष्ट्रीय औसत 90.6 फीसदी है, जिसके मुकाबले प्रदेश अभी भी 3.7 प्रतिशत पीछे है।

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Safe Delivery जिलों के बीच बड़ा अंतर

रिपोर्ट में जिलों के बीच भी बड़ा अंतर सामने आया है। बालोद और दुर्ग जैसे जिलों में संस्थागत प्रसव 95 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया है। वहीं बस्तर और बीजापुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में यह आंकड़ा करीब 65 फीसदी है। इससे स्पष्ट है कि दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और जागरूकता बढ़ाने की अभी भी आवश्यकता है।

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Safe Delivery विशेष अभियान चलाने की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि जिन जिलों में संस्थागत प्रसव 80 फीसदी से कम है, वहां विशेष अभियान चलाया जाए। प्रत्येक गर्भवती महिला की संभावित प्रसव तिथि, ब्लड ग्रुप, एंबुलेंस की उपलब्धता और नजदीकी अस्पताल की जानकारी पहले से सुनिश्चित की जाए। इससे आपात स्थिति में समय पर इलाज मिल सकेगा।

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सी-सेक्शन मामलों की होगी निगरानी

विशेषज्ञों ने निजी अस्पतालों में बढ़ रहे सी-सेक्शन (C-Section) मामलों का नियमित ऑडिट करने की भी सलाह दी है। उनका मानना है कि केवल चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर ही ऑपरेशन किया जाए। इससे अनावश्यक सर्जरी पर रोक लगेगी और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

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