सीजी भास्कर, 19 अगस्त : छत्तीसगढ़ में धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में धमतरी जिले के मांदागिरी पर्वत को विकसित करने की तैयारी है। यह स्थल जल्द ही धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और साहसिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। यहां पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली के साथ पहाड़, तालाब और वन क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
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मांदागिरी में प्रकृति और अध्यात्म का संगम
धमतरी जिले के नगरी यानी सिहावा क्षेत्र के मेचका गांव के पास स्थित मांदागिरी पर्वत का धार्मिक और प्राकृतिक महत्व है। मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। अब इस स्थल को पर्यटन केंद्र (Mandagiri Tourism) के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
वनांचल क्षेत्र में स्थित यह पहाड़ी प्रकृति और अध्यात्म का अनूठा संगम है। यहां धार्मिक महत्व के साथ प्राकृतिक सुंदरता भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से इस क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है मांदागिरी
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मुचुकुंद महाराज इक्ष्वाकु वंश के राजा मांधाता के पुत्र थे। सुर-असुर संग्राम के बाद उनकी तपस्या से जुड़े इस स्थल का संबंध सिहावा-नगरी क्षेत्र की सप्तऋषि तपोभूमि की आध्यात्मिक विरासत से बताया जाता है।
मांदागिरी पर्वत पर सुंदर तालाब, प्राचीन प्रतिमाएं और माता सीता सहित देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं। धार्मिक महत्व के कारण यहां श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। अब मांदागिरी पर्यटन (Mandagiri Tourism) को विकसित कर इस विरासत को पर्यटकों से जोड़ने की तैयारी है।
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पहाड़ी से दिखता है सोंढूर जलाशय का विहंगम नजारा
मांदागिरी पर्वत की ऊंचाई से सोंढूर जलाशय और आसपास फैले वनांचल का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। पहाड़ी का प्राकृतिक परिवेश ट्रेकिंग और एडवेंचर पर्यटन के लिए भी उपयुक्त माना जा रहा है। इसी वजह से धार्मिक पर्यटन के साथ साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) को भी यहां बढ़ावा देने की योजना है।
प्राकृतिक वातावरण में ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों के लिए यह क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बन सकता है। पहाड़ी से दिखाई देने वाला जलाशय और आसपास का हराभरा वन क्षेत्र यहां आने वाले पर्यटकों के अनुभव को और खास बना सकता है।
पहुंच मार्ग, पानी और सुरक्षा सुविधाओं पर होगा फोकस
धमतरी कलेक्टर के अनुसार मांदागिरी की आध्यात्मिक और प्राकृतिक क्षमता को देखते हुए इसके समग्र विकास की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए पहुंच मार्ग, स्वच्छता, पेयजल और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का आकलन किया जाएगा।
धार्मिक आस्था और प्राचीन विरासत के संरक्षण के साथ ट्रेकिंग और एडवेंचर स्पॉट भी चिन्हित किए जाएंगे। इससे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही पर्यटन स्थल पर आने वाले लोगों की सुरक्षा और सुविधा को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
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स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर
मांदागिरी पर्यटन विकास (Mandagiri Tourism) से वनांचल क्षेत्र में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों को पर्यटन से जोड़ने पर क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। इससे धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इको और पिलग्रिम टूरिज्म का बनेगा प्रमुख केंद्र
नगरी से करीब 27 किलोमीटर पूर्व स्थित मांदागिरी आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख इको-टूरिज्म (Eco Tourism) और पिलग्रिम टूरिज्म (Pilgrimage Tourism) स्थलों में अपनी पहचान बना सकता है। प्रकृति, अध्यात्म और रोमांच का संगम इसे पर्यटकों के लिए खास गंतव्य बनाने की क्षमता रखता है।
मांदागिरी पर्यटन (Mandagiri Tourism) के विकास से क्षेत्र की प्राकृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। सुविधाओं के विस्तार के बाद यह स्थल स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रदेश और देशभर से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन सकता है।
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