सीजी भास्कर, 21 अगस्त : देश में चीनी और दूसरी खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दामों को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को सड़क और रसोई दोनों जगहों पर कीमत चुकानी पड़ रही है। कांग्रेस का आरोप है कि गन्ने और अनाज का एक हिस्सा इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने से चीनी समेत कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ रहा है।
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चीनी के बढ़ते दामों पर कांग्रेस का हमला
जयराम रमेश (Sugar Price Hike) ने दावा किया कि तीन महीने में चीनी की कीमत 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। कांग्रेस के मुताबिक गुड़ के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा चावल और मक्के के आटे की कीमतों में भी वृद्धि का दावा किया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि करीब 25 लाख टन चीनी बनाने वाला गन्ना इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हुआ है। पार्टी ने दावा किया कि इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई और कीमतों में बढ़ोतरी हुई।
E20 पेट्रोल पर भी सरकार को घेरा
जयराम रमेश (E20 Policy) ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस का कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में माइलेज कम हो सकता है। वहीं, पुराने वाहनों में इससे जुड़ी तकनीकी परेशानियां भी सामने आने की आशंका जताई गई है।
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कांग्रेस ने मांग की है कि वाहन चालकों को अपनी जरूरत के अनुसार बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि E20 नीति लागू करने के साथ आम लोगों पर पड़ने वाले आर्थिक असर का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
सरकार ने चीनी आयात का लिया फैसला
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी है। यह चीनी बिना आयात शुल्क के मंगाई जाएगी। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर नियंत्रण करना है।
दिल्ली में 65 रुपये किलो तक पहुंची चीनी
बताया गया है कि 21 अगस्त को दिल्ली में चीनी की कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो रही। कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सरकार के आयात फैसले और इथेनॉल नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
जयराम रमेश (Sugar Price Hike) ने सरकार से इथेनॉल नीति की समीक्षा करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति के साथ-साथ खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ने वाले असर को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।




