सीजी भास्कर, 22 अगस्त : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण-पोषण के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि डीएनए जांच (DNA Test Verdict) से किसी व्यक्ति के जैविक पिता होने की पुष्टि हो चुकी है, तो वह नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। कोर्ट ने जैविक पिता को बच्चे के लिए हर महीने 5 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। हालांकि, महिला की भरण-पोषण संबंधी अपील खारिज कर दी गई।
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डीएनए रिपोर्ट से पितृत्व हुआ साबित
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट के सामने पुलिस जांच के दौरान कराई गई डीएनए जांच (DNA Test Verdict) की रिपोर्ट रखी गई, जिसमें युवक के बच्चे का जैविक पिता होने की पुष्टि हुई थी।
मामले में सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के तिफरा निवासी महिला ने फैमिली कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की याचिका दायर की थी। महिला का कहना था कि उसकी पहचान सीपत चौक के पास दुकान चलाने वाले युवक से हुई थी। उसने आरोप लगाया कि युवक ने उसके साथ जबरदस्ती की और बाद में मांग भरकर उसे पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
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बच्चे को अपना मानने से किया था इनकार
महिला के अनुसार 16 जून 2022 को बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन युवक ने बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया। बाद में महिला को पता चला कि युवक पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं।
युवक ने महिला के आरोपों से इनकार किया। उसका कहना था कि वह पहले से शादीशुदा है और महिला को इसकी जानकारी थी। उसने आरोप लगाया कि शादी का दबाव बनाने के लिए उसके खिलाफ दुष्कर्म और अन्य मामलों में शिकायत दर्ज कराई गई।
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फैमिली कोर्ट ने खारिज की थी याचिका
फैमिली कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को महिला और बच्चे की भरण-पोषण याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद महिला और उसके तीन वर्षीय बच्चे ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन दायर की।
याचिका में बताया गया कि पुलिस जांच के दौरान हुई डीएनए जांच (DNA Test Verdict) में युवक के बच्चे का जैविक पिता होना साबित हो चुका है। इसके अलावा सिरगिट्टी थाने में हुए एक समझौते के दौरान भी युवक ने बच्चे को अपने पास रखने की बात स्वीकार की थी।
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महिला की अपील खारिज, बच्चे को मिली राहत
हाईकोर्ट ने महिला को भरण-पोषण नहीं देने के फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, बच्चे के मामले में कोर्ट ने अलग दृष्टिकोण अपनाया।
कोर्ट ने कहा कि डीएनए रिपोर्ट से बच्चे का पितृत्व स्पष्ट रूप से साबित हो चुका है। तीन वर्षीय बच्चे की अपनी कोई आय नहीं है, इसलिए उसकी बुनियादी जरूरतों और उचित परवरिश की जिम्मेदारी पिता की है।
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1 सितंबर से हर महीने मिलेंगे 5 हजार रुपये
हाईकोर्ट ने बच्चे को राहत देते हुए जैविक पिता को 1 सितंबर 2026 से हर महीने 5 हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस आदेश से स्पष्ट है कि पितृत्व साबित होने के बाद नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से पिता केवल इस आधार पर बच नहीं सकता कि उसने बच्चे को अपना मानने से इनकार किया था। यह फैसला डीएनए जांच (DNA Test Verdict) के आधार पर बच्चे के भरण-पोषण के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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