सीजी भास्कर, 09 सितम्बर। भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त रूटों पर ट्रेनों की बढ़ती आवाजाही और क्षमता के दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रेलवे के 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को फोर-लेन यानी चार ट्रैक वाला बनाने की योजना पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इन रूटों पर देश के कुल रेल ट्रैफिक का करीब 41 फीसदी हिस्सा आता है, जबकि ये नेटवर्क के लगभग 16 फीसदी हिस्से में फैले हैं। (Railway Corridor Upgrade)
रेलवे के मुताबिक इन कॉरिडोर पर अतिरिक्त ट्रैक बनने से यात्री और मालगाड़ियों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी। इससे व्यस्त रूटों पर ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने और मौजूदा ट्रैक पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
इन 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर पर फोकस : Railway Corridor Upgrade
रेलवे की योजना के तहत जिन प्रमुख हाई-डेंसिटी रूटों को चार ट्रैक वाला बनाने पर जोर है, उनमें शामिल हैं:
- दिल्ली-हावड़ा
- हावड़ा-चेन्नई
- चेन्नई-मुंबई
- मुंबई-दिल्ली
- दिल्ली-चेन्नई
- मुंबई-हावड़ा
- दिल्ली-गुवाहाटी
इन रूटों की कुल लंबाई करीब 11 हजार किलोमीटर बताई गई है। रेलवे के अनुसार इन पर अतिरिक्त लाइनें बनने से यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के संचालन में अधिक लचीलापन आएगा।
छत्तीसगढ़ को कैसे मिलेगा फायदा?
इस पूरी योजना का छत्तीसगढ़ के लिए भी खास महत्व है। राज्य से गुजरने वाला मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी नेटवर्क देश के सबसे महत्वपूर्ण रेल मार्गों में शामिल है। इस रूट पर माल और यात्री ट्रैफिक का दबाव काफी अधिक है।
इसी नेटवर्क के खड़गपुर-ज्हारसुगुड़ा सेक्शन में चौथी रेल लाइन से जुड़े काम को भी महत्व दिया जा रहा है। वहीं बिलासपुर क्षेत्र पहले से ही मुंबई-हावड़ा और कटनी-दिल्ली दिशा के महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क का हिस्सा है। इससे अतिरिक्त लाइन और क्षमता विस्तार का फायदा छत्तीसगढ़ की रेल कनेक्टिविटी और माल परिवहन को मिल सकता है।

खड़गपुर-ज्हारसुगुड़ा के लिए 367 किमी की चौथी लाइन : Railway Corridor Upgrade
आपके दिए विवरण के अनुसार, मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी नेटवर्क के खड़गपुर-ज्हारसुगुड़ा हिस्से में करीब 367 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन के लिए 6,528 करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान बताया गया है।
इससे ओडिशा और छत्तीसगढ़ से जुड़े महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं माल परिवहन मार्गों पर रेल क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अरक्कोनम-रेनिगुंटा सेक्शन भी होगा मजबूत
इसके अलावा अरक्कोनम-रेनिगुंटा सेक्शन में तीसरी और चौथी रेल लाइन से जुड़े प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया गया है। करीब 77 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट पर 1,936 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।
रेलवे का फोकस ऐसे व्यस्त सेक्शनों पर अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध कराने का है, जहां यात्री और मालगाड़ियों की संख्या अधिक है।
करीब 11 हजार किमी नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की तैयारी : Railway Corridor Upgrade
रेलवे की व्यापक योजना करीब 11,000 किलोमीटर के हाई-डेंसिटी नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की है। इन कॉरिडोर पर अतिरिक्त लाइनें बिछने से ट्रेनों की आवाजाही को अलग-अलग ट्रैक पर व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य भीड़ कम करना, नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना और भविष्य की यात्री व माल परिवहन जरूरतों के लिए रेलवे को तैयार करना है।
छत्तीसगढ़ के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख कोयला, स्टील और औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है और यहां से बड़ी मात्रा में माल रेल के जरिए दूसरे राज्यों तक जाता है। ऐसे में हाई-डेंसिटी रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से माल परिवहन की गति और विश्वसनीयता में सुधार की उम्मीद है। बिलासपुर स्थित दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का नेटवर्क भी इस लिहाज से महत्वपूर्ण है।



