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Home » झारखंड ACB ने AP त्रिपाठी से पूछताछ की मांगी अनुमति : छत्तीसगढ़ जैसे घोटाले की साजिश के आरोप, नई शराब नीति के डिजाइन में थे शामिल

झारखंड ACB ने AP त्रिपाठी से पूछताछ की मांगी अनुमति : छत्तीसगढ़ जैसे घोटाले की साजिश के आरोप, नई शराब नीति के डिजाइन में थे शामिल

By Newsdesk Admin
06/07/2025
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सीजी भास्कर, 06 जुलाई। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के आरोपी अरुणपति त्रिपाठी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। झारखंड की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने छत्तीसगढ़ के पूर्व विशेष सचिव एपी त्रिपाठी से पूछताछ करने की अनुमति मांगी है।

Contents
  • झारखंड में भी छत्तीसगढ़ जैसे घोटाले की साजिश रचने के आरोप
  • शराब नीति निर्माण में त्रिपाठी की भूमिका पर सवाल
  • त्रिपाठी को पहले ही मिल चुकी है सुप्रीम कोर्ट से जमानत
  • कौन हैं अरुणपति त्रिपाठी ?
  • अब जानिए छत्तीसगढ़ में कैसे हुआ शराब घोटाला
  • A, B और C कैटेगरी में बांट कर किया गया घोटाला
  • शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिले शॉर्ट लिस्टेड किए गए

ACB ने रांची के स्पेशल कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट के लिए आवेदन लगाया है। मामला झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़ा हुआ है।

ACB रांची की टीम ने शनिवार को स्पेशल जज योगेश कुमार सिंह की अदालत में प्रोडक्शन वारंट आवेदन दिया। आवेदन मंजूर होने के बाद झारखंड ACB की टीम त्रिपाठी को रांची ले जाकर पूछताछ करेगी।

एपी त्रिपाठी पर छत्तीसगढ़ जैसे शराब घोटाले की साजिश के आरोप है। क्योंकि त्रिपाठी झारखंड में लागू की गई नई शराब नीति के डिजाइन में शामिल थे।

झारखंड में भी छत्तीसगढ़ जैसे घोटाले की साजिश रचने के आरोप

आरोप है कि झारखंड के निलंबित IAS विनय कुमार चौबे ने एपी त्रिपाठी के साथ मिलकर झारखंड में भी छत्तीसगढ़ जैसी घोटाले की साजिश रची थी। झारखंड एसीबी इस मामले में पहले ही विनय चौबे समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

माना जा रहा है कि त्रिपाठी से पूछताछ के बाद झारखंड शराब घोटाले से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

शराब नीति निर्माण में त्रिपाठी की भूमिका पर सवाल

झारखंड ACB का आरोप है कि एपी त्रिपाठी झारखंड में लागू की गई नई शराब नीति के डिजाइन में शामिल रहे थे। यही मॉडल छत्तीसगढ़ से प्रेरित था। आरोप है कि इस नीति के जरिए बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।

त्रिपाठी को पहले ही मिल चुकी है सुप्रीम कोर्ट से जमानत

बता दें कि एपी त्रिपाठी अप्रैल 2025 में ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर रिहा हुए थे। वे छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी की कार्रवाई के बाद लंबे समय तक जेल में थे। अब झारखंड ACB के प्रोडक्शन वारंट के चलते उनकी कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं।

कौन हैं अरुणपति त्रिपाठी ?

अरुणपति त्रिपाठी छत्तीसगढ़ सरकार के आबकारी विभाग के विशेष सचिव रह चुके हैं। इससे पहले वे छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के एमडी भी रहे हैं। त्रिपाठी मूल रूप से इंडियन टेलीकॉम सर्विस के अधिकारी हैं और डेपुटेशन पर छत्तीसगढ़ में कार्यरत थे।

शराब घोटाले में उनकी भूमिका को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 5 अक्टूबर 2024 को रायपुर की विशेष अदालत में उनके खिलाफ मामला दायर किया। कोर्ट ने उसी दिन इस मामले पर संज्ञान लिया था, लेकिन 7 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने PMLA कोर्ट के संज्ञान को रद्द कर दिया। अरुणपति त्रिपाठी 8 अगस्त 2024 से न्यायिक रिमांड पर जेल में बंद थे।

अब जानिए छत्तीसगढ़ में कैसे हुआ शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है।

ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

A, B और C कैटेगरी में बांट कर किया गया घोटाला

A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन

2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था।

कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान न हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई।

B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना

डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया।

होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी। खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई।

खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली। सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी।

शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिले शॉर्ट लिस्टेड किए गए

शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई।

इसकी MRP सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी।

डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है।

C: डिस्टलरीज की सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना

देशी शराब को CSMCL के दुकानों से बिक्री करने के लिए डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को सिंडिकेट ने 8 जोन में विभाजित किया। इन 8 जोन में हर डिस्टलरी का जोन निर्धारित होता था। 2019 में सिंडिकेट की ओर से टेंडर में नई सप्लाई जोन का निर्धारण प्रतिवर्ष कमीशन के आधार पर किया जाने लगा।

एपी त्रिपाठी ने सिंडिकेट को शराब बिक्री का जोन अनुसार विश्लेषण मुहैया कराया था, ताकि क्षेत्र को कम-ज्यादा करके पैसा वसूल किया जा सके।

इस प्रक्रिया को करके सिंडिकेट डिस्टलरी से कमीशन लेने लगा। EOW के अधिकारियों को जांच के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि तीन वित्तीय वर्ष में देशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज ने 52 करोड़ रुपए पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिया है।
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