सीजी भास्कर, 24 जुलाई : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक बार फिर नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति और “नियत नेल्ला नार” योजना से प्रभावित होकर कुल 25 सक्रिय व खूंखार माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें से एक पर 25 लाख और कुल 23 पर 1.15 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वालों में ओड़िशा राज्य कमेटी के टॉप कमांडर और सब जोनल ब्यूरो कमांडर रामन्ना ईरपा उर्फ जगदीश उर्फ विकेश भी शामिल है, जिस पर 25 लाख का इनाम था। इसके अलावा डीवीसीएम, पीपीसीएम, एरिया कमेटी सदस्य, मिलिशिया, जनताना सरकार पदाधिकारी सहित कई महिला माओवादी भी शामिल हैं।
यह आत्मसमर्पण आईजी बस्तर रेंज सुंदरराज पी., डीआईजी कमलोचन कश्यप, एसपी बीजापुर डॉ. जितेंद्र यादव समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष हुआ। आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरकार की नीति के तहत प्रोत्साहन स्वरूप ₹50,000 की सहायता राशि चेक के रूप में प्रदान की गई।
2025 की स्थिति
जनवरी 2025 से अब तक 300 माओवादी गिरफ्तार हुए।
242 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया।
127 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए।
आइजी और एसपी बोले
आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि सुरक्षा बलों – डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ, केरिपु और कोबरा – की संयुक्त कार्यवाही से नक्सल संगठन का शीर्ष ढांचा हिल चुका है। अब लगातार बड़े कैडर संगठन से बाहर निकल रहे हैं। वहीं एसपी डॉ. जितेंद्र यादव ने माओवादियों से अपील करते हुए कहा कि राज्य की नई पुनर्वास नीति उनके लिए एक नई शुरुआत है। सरकार की योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास, रोजगार, शिक्षा और जीवनयापन की संपूर्ण व्यवस्था मिल रही है।
माओवादी आत्मसमर्पण के पीछे ये प्रमुख कारण रहे
सुदूर अंचलों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं पहुंचना।
संगठन के अंदर लगातार मतभेद, शोषण और हिंसा।
सुरक्षा बलों की मजबूत पकड़ और आक्रामक अभियान।
“नियत नेल्ला नार” योजना और पुनर्वास नीति की जनहितकारी पहल।





