सीजी भास्कर, 29 अगस्त : झारखंड के गिरिडीह में सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों पर भी ‘आड-ईवन’ का (School Capacity Management) लागू है। यहां नामांकित छात्राओं को पढ़ने के लिए चार दिन और छात्रों को दो दिन निर्धारित किए गए हैं। सभी उसी क्रम में विद्यालय आते हैं। छात्राओं की संख्या अधिक होने के कारण उन्हें भी आधी-आधी संख्या में बुलाया जाता है। इस तरह बच्चे सप्ताह में केवल दो दिन ही स्कूल आकर पढ़ाई कर पाते हैं। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों और उनके अभिभावकों से सहयोग का आग्रह किया है। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस स्थिति से अवगत हैं, लेकिन सिस्टम के आगे लाचार हैं।
गिरिडीह प्लस टू उच्च विद्यालय में तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन है, जबकि विद्यालय में बैठने की क्षमता केवल 1200 विद्यार्थियों की है। यदि सभी छात्र एक साथ आएँ तो बैठने की व्यवस्था कठिन हो जाती है। कुछ छात्रों को जमीन पर बैठना पड़ता है या खड़े होकर पढ़ना पड़ता है। शिक्षकों ने इसका समाधान यह निकाला कि विद्यार्थियों को एक साथ नहीं बुलाया जाए और केवल उतने ही छात्रों को बुलाया जाए जितने आराम से पढ़ सकें। ऐसा करने से पढ़ाई की गुणवत्ता बनी रहती है।
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, नौवीं और दसवीं कक्षा में लगभग 1500 विद्यार्थी हैं। इंटर कला में 1300, वाणिज्य में 160 और विज्ञान में 180 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। कक्षा 11 कला की लक्ष्मी कुमारी और साबिया परवीन बताती हैं कि यदि छात्र संख्या अधिक हो जाए तो कई बार जमीन पर बैठकर पढ़ना पड़ता है। यह पूरे विद्यालय में (School Capacity Management) की आवश्यकता को स्पष्ट करता है।
1887 में हुई स्थापना : यह गिरिडीह का सबसे पुराना माध्यमिक विद्यालय है। इसकी स्थापना 1887 में हुई थी। इस विद्यालय से व्यवसायी, अधिकारी और राजनीतिज्ञ निकले हैं। आइएएस केके खंडेलवाल, आइएफएस राहुल कुमार और पूर्व विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी ने भी इसी विद्यालय से शिक्षा ग्रहण की है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से (School Capacity Management) को ध्यान में रखा गया है।