सीजी भास्कर, 03 सितंबर। बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया (Low Pressure Area) के कारण छत्तीसगढ़ में मौसम विभाग (Weather Department) ने अगले दो दिनों तक राज्यभर में हल्की से मध्यम बारिश (Heavy Rainfall) होने की संभावना जताई है। वहीं, कुछ स्थानों पर भारी और एक-दो जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। गरज चमक के साथ बिजली गिर सकती है।
मौसम विभाग (Weather Alert) ने आज यानी बुधवार के लिए कांकेर, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी इन 4 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा बालोद, नारायणपुर, बीजापुर, बालोद, कबीरधाम इन पांच जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। अन्य जिलाें में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
बलरामपुर में लगातार बारिश से जिले के तातापानी से लगे लुत्तीसढ़सा में मंगलवार रात करीब 11 बजे पुराना बांध बह गया (Dam Break)। बांध के बहने से निचले इलाके के चार घर के 8 लोग बह गए। इनमें से दो की डेड बाडी (Dead Body) मिल गई है। बाढ़ में बहे 6 अन्य लोगों का पता नहीं चल सका है। मौके पर देर रात से रेस्क्यू टीम (Rescue Team) के साथ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद हैं।
पिछले 24 घंटों में ऐसा रहा मौसम (Heavy Rainfall)
पिछले 24 घंटों में प्रदेश में सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभागों के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। वहीं, बस्तर संभाग में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 32.5°C और सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.0°C राजनांदगांव में दर्ज किया गया।
जानिए क्या है मानसून द्रोणिका और लो प्रेशर एरिया
मानसून द्रोणिका एक लंबी और कम दबाव वाली रेखा यानी लो प्रेशर लाइन होती है, जो भारत के उत्तर-पश्चिम से लेकर उत्तर-पूर्वी भाग तक फैली रहती है। यह आमतौर पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जाती है। कई बार इसका विस्तार पाकिस्तान और म्यांमार तक भी हो जाता है।
जब दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय होता है तो उत्तर भारत के मैदानी भागों में यह द्रोणिका विकसित होती है। इसकी स्थिति कभी उत्तर की ओर (हिमालय के पास) और कभी दक्षिण की ओर (मध्य भारत तक) खिसकती रहती है। जब मानसून द्रोणिका उत्तर की ओर रहती है तो हिमालय और उसके तराई वाले क्षेत्र (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तर बंगाल, असम) में ज्यादा बारिश होती है।
मानसून द्रोणिका देशभर में बारिश को कंट्रोल करती है
जब यह दक्षिण की ओर खिसकती है तो मध्य भारत और दक्षिण भारत के हिस्सों में भारी बारिश कराती है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाले लो प्रेशर एरिया इसी द्रोणिका के आसपास विकसित होकर आगे बढ़ते हैं और देशभर में बारिश करवाते हैं। इन शॉर्ट मानसून द्रोणिका भारत में वर्षा वितरण को नियंत्रित करने वाली एक मेन लिनियर लो प्रेशर बेल्ट है। इसकी स्थिति और सक्रियता के आधार पर ही यह तय होता है कि किस क्षेत्र में भारी, सामान्य या कम बारिश होगी।
(Heavy Rainfall) गर्मी बढ़ने से बनता है लो प्रेशर एरिया
जहां हवा का दबाव आसपास की जगहों से कम होता है, उसे लो प्रेशर एरिया कहते हैं। जब किसी इलाके में तापमान ज्यादा होता है (जैसे समुद्र की सतह या जमीन बहुत गर्म हो जाए)। गर्मी से हवा हल्की और ऊपर उठने लगती है। ऊपर हवा चली जाने से नीचे की सतह पर दबाव घट जाता है, और वह जगह लो प्रेशर एरिया बन जाती है। यहां पर आसपास से हवा अंदर की ओर खिंचती है। हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है और बादल और बारिश का कारण बनती है।
समुद्र पर बनने वाले लो प्रेशर एरिया कई बार बड़े तूफान (Cyclone) में बदल जाते हैं। भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले लो प्रेशर एरिया ही देशभर में भारी बारिश करवाते हैं। उदाहरण के तौर पर समझिए बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर बना तो वह मानसून द्रोणिका के साथ जुड़कर ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, यूपी तक बारिश करा देगा। अगर यह और ताकतवर हो जाए तो डीप डिप्रेशन और फिर साइक्लोन में बदल सकता है।



