Swachh Vayu Survey 2025 में निराशाजनक नतीजे
केंद्रीय स्तर पर घोषित (Swachh Vayu Survey 2025) के परिणाम छत्तीसगढ़ के लिए चौंकाने वाले रहे। देशभर के 130 शहरों में हुई रैंकिंग में राज्य का कोई भी शहर टॉप-3 में नहीं पहुंच पाया। यह उस समय की तस्वीर है जब राजधानी और औद्योगिक क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सुधारने के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।
रायपुर 11वें पायदान पर अटका
10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में रायपुर ने मामूली सुधार दिखाया। पिछले वर्ष की तुलना में एक कदम आगे बढ़कर रायपुर को इस बार 11वीं रैंक मिली है। राजधानी को 200 में से 184 अंक हासिल हुए, लेकिन टॉप-10 में जगह बनाने की उम्मीद अधूरी रह गई। इसके विपरीत, इंदौर ने 200 में से पूरे 200 अंक लेकर पहला स्थान हासिल किया।
कोरबा की स्थिति भी औसत
3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में कोरबा को केवल 18वां स्थान मिल पाया। यहां 172.5 अंक हासिल हुए। जबकि अमरावती, मुरादाबाद और झांसी ने इस कैटेगरी में क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान लिया। नतीजों से साफ है कि औद्योगिक धुएं और प्रदूषण नियंत्रण उपायों की कमी ने कोरबा की रैंकिंग को प्रभावित किया।
छोटे शहरों का प्रदर्शन भी कमजोर
तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की लिस्ट में भी छत्तीसगढ़ का कोई नाम टॉप-3 में नहीं दिखा। इस कैटेगरी में देवास, परवाणू और अंगुल ने क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे शहरों में भी प्रदूषण नियंत्रण की ठोस रणनीति का अभाव है।
करोड़ों खर्च, नतीजा अधूरा
हर साल नगर निगम और स्थानीय निकाय वायु सुधार पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं। सड़क पर जल छिड़काव, डस्ट कंट्रोल मशीनें, ग्रीन बेल्ट डेवलपमेंट जैसी योजनाओं के बावजूद रायपुर और कोरबा अपेक्षित परिणाम नहीं ला सके। जबकि इंदौर जैसे शहरों ने लगातार सुधार करके मिसाल पेश की है।
(Swachh Vayu Survey 2025) यह बताता है कि महज बजट खर्च करने से बदलाव नहीं आता, जब तक कि योजनाओं को जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू न किया जाए।



