सीजी भास्कर, 11 सितंबर। किसानों का धैर्य आखिर टूट गया। खेतों में खड़ी फसलें प्यास से कराह रही हैं और खाद की कमी(Fertilizer Crisis) से दम तोड़ रही हैं। ऐसी हालत में सरकार के बड़े-बड़े वादे खोखले साबित हो रहे हैं। बुधवार को किसानों ने प्रशासन को जगाने के लिए ऐसा तरीका चुना, जिसने हर किसी को चौंका दिया। गले में फंदा डालकर उन्होंने कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो हमारी जान लेना ही सरकार का अंतिम उद्देश्य माना जाएगा।
यह प्रदर्शन राजनांदगांव जिले के जिला कार्यालय परिसर में हुआ। आधा दर्जन गांवों से आए किसान वहां जुटे और जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि खाद की कमी (Fertilizer Shortage) से धान की फसल सूख रही है और पौधे बालियां आने से पहले ही मर रहे हैं। प्रशासन को स्थिति का अंदाजा पहले से था, इसलिए परिसर में कड़ी सुरक्षा तैनात की गई थी। लालबाग थाना प्रभारी राजेश साहू ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर डटे रहे।
270 की बोरी 1000 में खरीदने की मजबूरी
किसानों ने आरोप लगाया कि सहकारी सोसायटियों में यूरिया उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में उन्हें 270 रुपये की बोरी 1,000 रुपये तक खरीदनी पड़ रही है। इससे उनकी लागत कई गुना बढ़ गई है। किसानों ने कहा कि निजी कृषि केंद्रों में खाद का पर्याप्त भंडारण मौजूद है, लेकिन वहां खुलेआम कालाबाजारी (Black Marketing) चल रही है। शिकायत करने के बावजूद विभागीय अधिकारी केवल खानापूर्ति करते हैं और कार्रवाई करने से बचते हैं।
गोदाम भरे, पर किसान खाली हाथ
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना था कि गोदामों में खाद मौजूद है, लेकिन उसे ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। यह स्थिति उनकी मेहनत को बर्बाद कर रही है। धान की फसल (Crop Damage) जैसे-जैसे सूख रही है, वैसे-वैसे किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में पर्याप्त खाद है तो किसानों को क्यों भटकना पड़ रहा है।
प्रशासन और सरकार पर आरोप
किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी और सरकार दोनों ही इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे। प्रदर्शन में शामिल एक बुजुर्ग किसान ने कहा – “हमें बचाना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन लगता है उनकी नजरों में हमारी जिंदगी की कोई कीमत नहीं।” किसानों ने साफ कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। किसानों ने चेतावनी दी कि वे अब और चुप नहीं बैठेंगे। अगर कालाबाजारी पर रोक नहीं लगी और खाद समय पर नहीं मिली तो वे पूरे जिले में चक्काजाम करेंगे। उनका कहना है कि अब यह केवल यूरिया का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनकी रोज़ी-रोटी और अस्तित्व (Farmers Protest) का सवाल है।


