सीजी भास्कर, 11 सितंबर। केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए पेंशन(Pension Flexibility Reform) विकल्पों में लचीलापन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जिन कर्मचारियों ने एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को चुना था, वे अब सेवानिवृत्ति से एक साल पहले या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनने से तीन महीने पहले राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में वापस लौटने का विकल्प पा सकेंगे। इस कदम से सरकारी कर्मचारियों को (Pension Scheme Flexibility) का नया अवसर मिलेगा।
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को सीसीएस (राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत एकीकृत पेंशन योजना का कार्यान्वयन) नियम, 2025 जारी किए। ये नियम केंद्रीय कर्मचारियों को एनपीएस(Pension Flexibility Reform) और नई शुरू की गई यूपीएस के बीच चुनाव की सुविधा देंगे। मंत्री ने बताया कि यूपीएस नियमों में साफ लिखा है कि कर्मचारी किस प्रकार स्वयं को अंशदाता के रूप में नामांकित कर सकते हैं और लाभ पाने के लिए अपने विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं।
विज्ञान भवन में आयोजित 14वीं पेंशन अदालत में दस्तावेज जारी करने के बाद जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह अधिसूचना कर्मचारियों को ज्यादा लचीलापन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, यहां कर्मचारियों को (Retirement Planning Options) का स्पष्ट रोडमैप मिलेगा। उन्होंने बताया कि पेंशन अदालत से शिकायत निवारण में तेजी आई है और प्रक्रियात्मक देरी कम हुई है।
नई अधिसूचना के तहत कर्मचारियों को एनपीएस और यूपीएस के बीच अपना विकल्प चुनने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा। पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने व्यापक जागरूकता के लिए एक संपर्क अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। मंत्री ने कहा कि जो कर्मचारी बाद में अपना मन बदलते हैं, वे हमेशा के लिए एक ही विकल्प से बंधे नहीं रहेंगे। वे सेवानिवृत्ति से एक साल पहले या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से तीन महीने पहले एनपीएस में लौट सकते हैं। यह व्यवस्था (Government Employee Pension Choice) को और मजबूत करेगी।
लुधियाना, जालंधर और अन्य शहरों के पेंशनभोगियों ने भी इस फैसले पर संतोष जताया है। उनका कहना है कि पहले कर्मचारियों को जबरन एक ही पेंशन प्रणाली में बंधा रहना पड़ता था, लेकिन अब सरकार(Pension Flexibility Reform) ने सुधारवादी सोच दिखाई है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशन अदालत की प्रक्रिया में सुधार से वर्षों से लंबित मामलों का समाधान हुआ है और हजारों पेंशनभोगियों को समय पर न्याय मिला है।
इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान (Digital Life Certificate Drive) चलाने की घोषणा की है। यह अभियान एक से 30 नवंबर तक देश के सभी जिलों और उप-मंडल मुख्यालयों में चलेगा। पेंशनभोगियों को हर साल जीवन प्रमाण पत्र जमा करना आवश्यक होता है ताकि उनकी पेंशन का भुगतान जारी रह सके। सरकार का मानना है कि यह डिजिटल पहल पेंशनभोगियों को सुविधा प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम है।
कुल मिलाकर, यह फैसला पेंशन प्रणाली में पारदर्शिता और लचीलापन बढ़ाएगा। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अब अधिक विकल्प, तेज निवारण और डिजिटल सेवाओं का लाभ मिलेगा।


