सीजी भास्कर, 15 सितंबर। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके (Naxal Surrender) और सफलता से कम नहीं है। लंबे समय से वांछित एक महिला, जिस पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था, अचानक पुलिस के सामने पहुंची और हथियार डाल दिए। वर्षों से पहाड़ियों और जंगलों में सक्रिय यह चेहरा अचानक आत्मसमर्पण की खबर के साथ सुर्खियों में आ गया। पुलिस अधिकारियों ने इसे संगठन के अंदर की बड़ी दरार बताया है।
बताया जा रहा है कि यह महिला न केवल लंबे समय से सक्रिय थी, बल्कि संगठन के भीतर उसकी हैसियत बेहद ऊंची थी। कई ऑपरेशनों में उसका नाम जुड़ा रहा और सुरक्षाबलों को लगातार उसकी तलाश थी। उसके सामने आने से संगठन की रीढ़ पर सीधा असर पड़ा है। (Naxal Surrender) की यह घटना केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए राहत नहीं बल्कि माओवादियों के लिए गहरी चोट साबित हो रही है।
पुलिस ने खुलासा किया कि यह महिला और कोई नहीं बल्कि कुख्यात माओवादी जानसी उर्फ कौशल्या है। वह मृतक डीवीसी मेंबर सत्यम गावड़े की पत्नी है और करीब 20 वर्षों से संगठन में सक्रिय रही। दोनों सीसी मेंबर के मारे जाने के बाद जानसी वरिष्ठ नेताओं में शामिल हो गई थी। वर्तमान में वह नगरी एरिया कमेटी की सचिव थी और संगठन की रणनीति में उसका विशेष योगदान माना जाता था। यह घटना छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के नगरी क्षेत्र में दर्ज की गई, जहां उसने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने प्रेसवार्ता में बताया कि जानसी ने शासन की पुनर्वास नीति और पारिवारिक दबाव के कारण यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही कार्रवाई के बाद संगठन कमजोर हो रहा है। बड़े नेताओं के मारे जाने से छोटे कैडरों का मनोबल टूट रहा है। (Naxal Surrender) से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि संगठन की पकड़ अब ढीली पड़ रही है।
पिछले नौ महीनों में सुरक्षा बलों ने मोर्चे पर उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। इस अवधि में 28 नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए और 27 ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। विशेषज्ञों का मानना है कि जानसी जैसे वरिष्ठ कैडर का आत्मसमर्पण नक्सल संगठन की आंतरिक टूट और हताशा को उजागर करता है। पुलिस को विश्वास है कि आने वाले समय में और भी नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। (Naxal Surrender) की यह घटना न केवल सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाती है बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और स्थायित्व की नई उम्मीद भी जगाती है।





