सीजी भास्कर, 17 सितंबर। देशभर में सुरक्षा बलों की लगातार और तीव्र कार्रवाई ने चार दशक तक बंदूक थामकर क्रांति का झूठा सपना दिखाने वाले माओवादी (Naxalite Surrender) संगठन की कमर तोड़ दी है। बीते 18 महीनों में 500 से अधिक नक्सली ढेर किए जा चुके हैं, जिनमें 13 केंद्रीय समिति स्तर के बड़े लीडर भी शामिल रहे। केवल छत्तीसगढ़ में ही शीर्ष कमांडर बसव राजू, चलपति, सुधाकर और मोडेम बालकृष्ण एनकाउंटर में मारे गए। करीब दो हजार कैडर और समर्थकों ने (Naxalite surrender) कर दिया। इन्हीं हालातों के दबाव में अब संगठन पहली बार हथियार छोड़ शांति वार्ता की राह पकड़ने को मजबूर दिख रहा है।
पहली दफा पहचान उजागर करते हुए ईमेल जारी
15 अगस्त 2025 को केंद्रीय समिति प्रवक्ता अभय के नाम से निकले पत्र में संगठन ने संघर्ष विराम की घोषणा कर कहा कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होकर जनता की समस्याओं का समाधान चाहते हैं। खास यह कि यह पत्र संगठन के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट, ईमेल और अभय की तस्वीर के साथ सार्वजनिक मंच पर लाया गया।
सुरक्षा विशेषज्ञ इसे दो कोणों से देख रहे हैं। एक तरफ यह कदम शांति प्रक्रिया की दिशा में मील का पत्थर बताया जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर इसे संदेहास्पद भी करार दिया जा रहा है। अब तक नक्सली नेतृत्व ने कभी अपनी तस्वीर या पहचान सार्वजनिक नहीं की थी। पत्र में दिए गए ईमेल और फेसबुक अकाउंट सुरक्षा एजेंसियों के लिए संगठन के नेटवर्क और हैंडलरों तक पहुंच बनाने का माध्यम बन सकते हैं। यही वजह है कि गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस पत्र की प्रामाणिकता की जांच कराने के आदेश दिए हैं।
10 महीनों में छठी अपील
पिछले दस महीनों में माओवादी संगठन ने यह छठी बार सरकार से संवाद की पहल की है। हालांकि, पहले के प्रयास हिंसा और सुरक्षा बलों पर हमलों की वजह से धराशायी हो चुके। सरकार लगातार यह शर्त रखती आई है कि हथियारों के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता मुमकिन नहीं। मगर इस बार नक्सलियों ने साफ कहा है कि शांति वार्ता पर सहमत कैडरों के अलावा जेलों में बंद साथियों और अन्य राज्यों में सक्रिय नेताओं से रायशुमारी आवश्यक है। इसके लिए संगठन ने एक माह का संघर्ष विराम मांगा है, ताकि बातचीत ठोस और लंबे समय तक चलने वाली साबित हो सके।
फोर्स की दबंग कार्रवाई से बिखरा नेटवर्क
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और झारखंड में सुरक्षा बलों के साझा अभियानों ने नक्सलियों को गहरी चोट दी है। जनवरी 2025 से अब तक छत्तीसगढ़ में 463 नक्सली ढेर किए गए, जबकि एसजेडसीएम स्तर के 13 से अधिक बड़े नेता भी मुठभेड़ों में मारे गए।
इसी दौरान केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता ने तीन दिन पूर्व तेलंगाना में (Naxalite surrender) कर दिया। इससे पहले एसजेडसीएम कमलेश, ककराला सुनीता और केवल बस्तर में सक्रिय 1500 से अधिक नक्सली हथियार डाल चुके हैं। मई 2024 में गढ़चिरौली में 28 शीर्ष माओवादी मारे गए थे। अब यह साफ है कि संगठन का ढांचा सुरक्षा बलों की तगड़ी कार्रवाई से लगातार कमजोर पड़ रहा है।
आखिरकार, अब संगठन को भी समझ आ रहा है कि बंदूक की बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था में शामिल होना ही सही रास्ता है। यही कारण है कि लगातार (Naxalite surrender) के बाद अब माओवादी नेतृत्व सरकार से वार्ता के लिए झुकता दिखाई दे रहा है।






