रायपुर से लेकर बलरामपुर तक आज दिनभर एक ही बात चर्चा में रही। गांवों में काम कर रहीं महिलाओं के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने माहौल को अलग ही ऊर्जा दे दी। प्रशिक्षण केंद्र में जैसे ही वे पहुंचे, वहां मौजूद महिलाओं और युवाओं में उत्साह साफ नजर आया, हर कोई अपनी बात साझा करने को उत्सुक दिखा।
सुशासन तिहार के बीच यह दौरा अचानक ही लोगों के बीच चर्चा का कारण (Rural Empowerment) बन गया। खासकर पशुपालन से जुड़ी महिलाओं से सीधा संवाद और उनके काम को समझने की कोशिश ने ग्रामीण क्षेत्रों में एक नई उम्मीद जगाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह का जुड़ाव अक्सर देखने को नहीं मिलता।
प्रशिक्षण केंद्र में गतिविधियों का लिया जायजा (Rural Empowerment)
बलरामपुर जिले के प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशिक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को करीब से देखा। प्रशिक्षण कक्ष में चल रही गतिविधियों की जानकारी लेते हुए उन्होंने वहां मौजूद प्रतिभागियों से बातचीत की और उनके अनुभव जाने।
इस दौरान उन्होंने आत्मीय तरीके से अभिवादन किया और प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से सीधे संवाद स्थापित किया। माहौल काफी सहज रहा, जिससे प्रतिभागियों ने खुलकर अपनी बात रखी।
पशु सखियों से बातचीत में सामने आए अनुभव
पशुपालन का प्रशिक्षण ले रहीं महिलाओं से चर्चा के दौरान कई अहम बातें (Rural Empowerment) सामने आईं। रामचंद्रपुर विकासखंड के बगरा क्लस्टर के केवली गांव की अनुराधा गुप्ता ने बताया कि वे बिहान योजना से जुड़कर पशु सखी के रूप में काम कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि गांव में पशुओं का सर्वे करना, पशु चिकित्सकों को सहयोग देना और ग्रामीणों को जरूरी जानकारी देना उनके काम का हिस्सा है। साथ ही बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने का भी जिम्मा वे निभा रही हैं।
अनुराधा ने यह भी बताया कि संस्थान में मिल रहा प्रशिक्षण उनके काम को बेहतर बनाने में मदद कर रहा है और वे पहले से ज्यादा आत्मविश्वास के साथ काम कर पा रही हैं।
सरकार का फोकस आत्मनिर्भरता पर
मुख्यमंत्री ने इस दौरान साफ कहा कि राज्य में ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कौशल विकास और स्वरोजगार को प्राथमिकता देते हुए ऐसे प्रशिक्षण केंद्रों को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ये संस्थान केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक अहम माध्यम बन रहे हैं।
सैकड़ों लोगों को मिल चुका है प्रशिक्षण
जिले में संचालित इस संस्थान के माध्यम से अब तक 16 बैचों में कुल 510 प्रशिक्षणार्थियों को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय की दिशा में तैयार किया जा रहा है। इसका असर यह है कि लोग धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहे हैं और गांव स्तर पर रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।


