सीजी भास्कर, 20 सितंबर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली योजना अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणा बन गई है। Bhupesh Baghel Schemes के तहत लागू की गई ‘नरवा, गरुवा, घुरवा अउ बारी’ से जुड़ा आइडिया दिल्ली में भी आकार लेने जा रहा है। राजधानी में तैयार हो रहा बायोगैस प्लांट इसी सोच को आगे बढ़ाता है, जिसमें हर घर से निकलने वाले ‘घुरवा’ यानी गोबर को ऊर्जा और खाद में बदलने की योजना शामिल है।
Delhi Biogas Plant और Narva Garuva Ghuruva Bari Model
दिल्ली के नंगली डेयरी फार्म में Delhi Biogas Plant अगले महीने शुरू होने वाला है। बीओटी योजना के तहत बना यह प्लांट डेयरी मालिकों को सीधी आय का जरिया देगा। गाय-भैंस का गोबर प्लांट चलाने वाली कंपनी खरीदेगी और इसके बदले डेयरी संचालकों को हर महीने अतिरिक्त कमाई होगी। यह प्लांट सिर्फ आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नालियों में बहाए जाने वाले गोबर से छुटकारा दिलाएगा और शहर को साफ-सुथरा रखने में भी मदद करेगा।
656 रुपये प्रति टन की दर से खरीदी
अधिकारियों के मुताबिक, नंगली में बना Biogas Project करीब 2.72 एकड़ जमीन पर फैला है और इसमें 200 मीट्रिक टन तक गोबर प्रोसेस करने की क्षमता है। यहां गोबर 656 रुपये प्रति टन की दर से खरीदा जाएगा। प्रोसेसिंग के बाद तैयार सीएनजी को IGL कंपनी को सप्लाई किया जाएगा और बचा हुआ कंपोस्ट खाद पार्कों और हरित क्षेत्रों को संवारने में इस्तेमाल होगा।
छत्तीसगढ़ से मिली प्रेरणा
भूपेश बघेल ने ‘Narva, Garuva, Ghuruva au Bari ’ योजना की शुरुआत करते समय स्पष्ट किया था कि ग्रामीण घरों में बायोगैस प्लांट लगाकर उज्ज्वला योजना जैसी बाहरी जरूरत खत्म की जा सकती है। नरवा यानी जलस्रोतों का संरक्षण, गरुवा यानी मवेशियों की देखभाल, घुरवा यानी गोबर से खाद और गैस बनाना, तथा बारी यानी घर के पास की जमीन का उपयोग—इन चार स्तंभों ने छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी।
Delhi Model से होगा दोहरा फायदा
राजधानी दिल्ली में यह Bhupesh Baghel Schemes Inspired Model न केवल डेयरी मालिकों की आय बढ़ाएगा, बल्कि यमुना नदी जैसे जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने का भी काम करेगा। गोबर और जैविक कचरा अब बोझ नहीं बल्कि आय का बड़ा साधन बनते दिख रहे हैं। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो यह साबित करेगा कि छत्तीसगढ़ का मॉडल सिर्फ ग्रामीण विकास की मिसाल नहीं बल्कि राष्ट्र-स्तरीय नीतियों के लिए भी दिशा-निर्देशक बन सकता है।



