सीजी भास्कर, 23 सितंबस। छत्तीसगढ़ का प्रमुख पर्यटन स्थल मैनपाट अब सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि एक अनोखे पर्यावरणीय नवाचार के लिए भी चर्चा में है। यहाँ के रोपाखार में देश का पहला ग्रामीण गार्बेज कैफे (Rural Garbage Cafe) शुरू किया गया है, जो एक नई पहल के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है। यह कैफे ‘कचरा लाओ, खाना पाओ’ की सरल अवधारणा पर काम करता है। इसका संचालन कार्ब हट किचन द्वारा किया जा रहा है।
कैसे काम करता है यह अनूठा कैफे
यह कैफे लोगों को प्लास्टिक कचरा लाने के बदले नाश्ता और भरपेट भोजन दे रहा है। एक किलो प्लास्टिक कचरा (जैसे पानी की बोतलें, एल्युमीनियम कैन) देने पर हल्का नाश्ता मिलता है। वहीं, दो किलो कचरा (Rural Garbage Cafe) जमा करने पर भरपेट भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। यह प्रयास न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पर्यटकों को भी पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहा है।
मैनपाट में पहले प्लास्टिक कचरे के निपटान की कोई खास व्यवस्था नहीं थी। इससे पर्यटन स्थलों पर गंदगी बढ़ती जा रही थी। इस समस्या को देखते हुए जिला पंचायत सरगुजा ने यह अभिनव पहल की। सीईओ विनय अग्रवाल का कहना है कि इसका उद्देश्य स्वच्छता के लिए लोगों को प्रेरित करना है।
प्लास्टिक से बन रहे उपयोगी उत्पाद
इस कैफे में जमा किए गए प्लास्टिक कचरे (Rural Garbage Cafe) को सरगुजा जिले के दरिमा में स्थित जिला स्तरीय प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट में भेजा जाता है। इस यूनिट का संचालन स्व-सहायता समूह की महिलाएं करती हैं। यहाँ प्लास्टिक को रिसाइकिल करके उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं, जैसे कि दाने, रस्सी और कुर्सियाँ। यह पहल न केवल कचरा प्रबंधन में मदद कर रही है, बल्कि महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर भी पैदा कर रही है। यह एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे अपशिष्ट को संपत्ति में बदला जा सकता है।
मैनपाट की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान
मैनपाट, जिसे छत्तीसगढ़ का शिमला भी कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के तिब्बती मठ और संस्कृति इसे एक अलग पहचान देते हैं। मैनपाट में ‘उल्टा पानी’ जैसे अनूठे प्राकृतिक आकर्षण भी हैं, जहाँ पानी गुरुत्वाकर्षण के विपरीत बहता हुआ दिखाई देता है। यहाँ तिब्बती मंदिर, कलकल करते झरने, और साल के घने जंगल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इस गार्बेज कैफे की शुरुआत से मैनपाट की छवि और भी बेहतर हो रही है।
यह एक कदम है साफ और स्वच्छ भविष्य की ओर
ग्रामीण गार्बेज कैफे एक छोटा कदम है, लेकिन यह एक बड़े बदलाव की शुरुआत है। यह लोगों को प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। साथ ही, यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर नवाचार करके बड़ी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। यह पहल दूसरे पर्यटन स्थलों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा बन सकती है।



