सीजी भास्कर, 24 सितंबर। प्रदेश में चल रही जननी सुरक्षा योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रसव के बाद मिलने वाली सहायता राशि (Janani Suraksha Yojana) पिछले तीन महीनों से करीब 50 हजार महिलाओं तक नहीं पहुंची है। जबकि केंद्र सरकार से इस योजना के लिए 55.85 करोड़ का फंड पहले ही स्वीकृत हो चुका है।
क्या है मामला?
नियमों के अनुसार, प्रसव के सात दिन के भीतर महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना (Janani Suraksha Yojana) के तहत सहायता राशि दी जानी चाहिए। लेकिन तीन महीने से महिलाएं बैंकों और अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं। रायपुर जिले में ही 6,200 प्रसव हुए, जिनमें से 2,200 महिलाओं को अब तक भुगतान नहीं मिला।
ग्रामीण महिला को मिलता है: 1,400
शहरी महिला को मिलता है: 1,000
प्रदेश में लक्ष्य: 6.81 लाख महिलाओं को लाभ
अप्रैल-अगस्त तक प्रसव: 1.47 लाख
अब तक भुगतान न मिलने वाली महिलाएं: 50,000+
महिलाओं की पीड़ा
गुढ़ियारी की सीमा साहू ने दिसंबर 2024 में बेटी को जन्म दिया था। उन्हें नर्स ने आश्वासन दिया था कि सात दिन में राशि खाते में आ जाएगी, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला। धरसींवा की ममता निषाद का कहना है कि तीन महीने हो गए, बच्चे की दवा और दूध के लिए उधार लेना पड़ रहा है।
मितानिन ने कहा था कि सरकार मदद (Janani Suraksha Yojana) करेगी, लेकिन आज तक एक रुपया नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग के एक ड्राइवर की पत्नी भी रोजाना दफ्तर का चक्कर काट रही है, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
अधिकारियों का बयान
डॉ. मिथिलेश चौधरी, सीएमएचओ रायपुर: “फंड की कमी के कारण भुगतान अटका है। राज्य स्तर पर डिमांड भेज दी गई है। फंड मिलते ही राशि तुरंत जारी कर दी जाएगी।”
श्यामबिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री, छग शासन: “मैं देखता हूं कि देरी क्यों हुई है। जल्द ही राशि जारी करने का निर्देश देता हूं।”
बीकेएस, रिटायर्ड IAS और स्वास्थ्य विशेषज्ञ: “जननी सुरक्षा योजना केवल पैसे बांटने की योजना नहीं है, यह मातृत्व शक्ति को सशक्त बनाने और नवजात को कुपोषण से बचाने का महत्वपूर्ण कदम है। सरकार को तुरंत भुगतान करना चाहिए, वरना योजना अपने असली मकसद से भटक जाएगी।”
योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है। लेकिन भुगतान में हो रही देरी से न सिर्फ महिलाओं की आर्थिक मुश्किलें बढ़ी हैं, बल्कि योजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।



