सीजी भास्कर, 01 अक्टूबर। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति ने नया मोड़ ले लिया है। एक ऐसा चेहरा, जिसने हाल ही में पार्टी को नुकसान पहुंचाया था, अब फिर उसी संगठन के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। इसकी वजह सिर्फ व्यक्तिगत मेल-मिलाप नहीं, बल्कि बड़े चुनावी समीकरणों को साधने की कवायद है। (Bihar Politics Update)
साल 2024 के लोकसभा चुनाव की यादें अब भी ताजा हैं, जब आंतरिक खींचतान ने कई सीटों पर राजग को चोट पहुंचाई थी। गिले-शिकवे इतने गहरे थे कि सहयोगी दलों के बीच विश्वास की खाई तक चौड़ी हो गई थी। अब हालात बदलते दिख रहे हैं। (Bihar Politics Update)
यह घटनाक्रम नई दिल्ली का है, जहां भोजपुरी फिल्म स्टार पवन सिंह की भाजपा में घर वापसी हुई। पवन सिंह ने पहले गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर मतभेद दूर किए और फिर उपेंद्र कुशवाहा से भी गले मिले। भाजपा की रणनीति है कि दक्षिण बिहार के काराकाट सहित शाहाबाद और मगध क्षेत्र की सीटों पर हुए नुकसान की भरपाई इस कदम से हो। (Bihar Politics Update)
लोकसभा चुनाव में बगावत कर पवन सिंह के काराकाट से मैदान में उतरने से उपेंद्र कुशवाहा की हार हुई थी और इसका असर छह अन्य सीटों पर भी पड़ा था। परिणामस्वरूप कुशवाहा और राजपूत मतदाताओं के बीच खाई गहरी हो गई थी। अब भाजपा मानती है कि पवन सिंह की वापसी से इस दरार को कम किया जा सकता है। (Bihar Politics Update)
भाजपा की सक्रियता और संगठन की पहल से यह डील संभव हो सकी। बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और संगठन मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने पवन सिंह को कुशवाहा से मिलवाया और समझौता कराया। अब पवन सिंह को भाजपा के स्टार प्रचारक की सूची में शामिल किए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि उनकी लोकप्रियता से युवा वोटरों में जोश आएगा और राजपूत-कुशवाहा समीकरण भी सुधरेगा।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा का यह कदम दक्षिण बिहार की दो दर्जन सीटों पर असर डाल सकता है। हालांकि सफलता के लिए यह भी जरूरी है कि पवन सिंह मर्यादा में रहकर संगठन की रणनीति के मुताबिक काम करें।


