सीजी भास्कर, 9 अक्टूबर। स्वच्छता में देशभर में अग्रणी इंदौर नगर निगम ने अब राजनीतिक स्वच्छता की दिशा में भी अहम कदम बढ़ाया है। गुरुवार को नगर निगम परिषद के सम्मेलन में लव जिहाद के आरोपित पार्षद अनवर कादरी (Love Jihad Councillor Indore Case) की पार्षदी समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया। नगर निगम के इतिहास में यह संभवतः पहली बार हुआ है कि किसी पार्षद की सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव सदन में बहुमत से पारित हुआ हो।
इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए 57 पार्षदों की सहमति जरूरी थी, लेकिन 67 पार्षदों ने समर्थन देते हुए कहा कि ऐसे आरोपित को पार्षद बने रहने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। प्रस्ताव पारित होने के बाद इंदौर नगर निगम ने राज्य शासन और निर्वाचन विभाग को इसकी जानकारी भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि वार्ड में शीघ्र उपचुनाव कराए जा सकें।
कांग्रेस ने किया बहिष्कार, बाहर आकर दिया धरना
कादरी की पार्षदी समाप्त करने के प्रस्ताव पर चर्चा से पहले कांग्रेस पार्षदों ने सम्मेलन का बहिष्कार किया। वे सदन से बाहर आकर धरने पर बैठ गए और प्रस्ताव को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। कांग्रेस पार्षदों ने चर्चा और मतदान, दोनों से दूरी बनाए रखी। वहीं भाजपा और निर्दलीय पार्षदों ने प्रस्ताव का समर्थन किया। बता दें कि 15 जून 2025 को पुलिस ने लव जिहाद के आरोप में साहिल और अल्ताफ नामक दो युवकों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान दोनों ने खुलासा किया कि पार्षद अनवर कादरी (Love Jihad Councillor Indore Case) ने उन्हें इस गतिविधि के लिए फंडिंग दी थी। यही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि कादरी ने जम्मू-कश्मीर से फर्जी हथियार लाइसेंस बनवाया था।
सरेंडर के बाद से जेल में है पार्षद अनवर कादरी
एक अगस्त 2025 को पार्षद कादरी ने जिला न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में है। पुलिस ने उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है और फंडिंग नेटवर्क की जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, कादरी की राजनीतिक गतिविधियां और संपर्क भी पुलिस जांच के दायरे में हैं। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि पार्षद की सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव (Love Jihad Councillor Indore Case) विधिक प्रक्रिया के अनुरूप है। यह निर्णय सदन की सामूहिक राय से लिया गया है। अधिकारी ने बताया कि शासन को प्रस्ताव भेजने के बाद चुनाव आयोग उपचुनाव की घोषणा करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला इंदौर नगर निगम के इतिहास में एक मिसाल बनेगा। पहली बार किसी जनप्रतिनिधि को अपराध के आरोप में पद से हटाने की कार्रवाई की गई है। इसे राजनीतिक स्वच्छता की दिशा में एक साहसिक कदम माना जा रहा है।
इंदौर ने दिखाई ‘राजनीतिक स्वच्छता’ की मिसाल
इंदौर ने न सिर्फ देश में स्वच्छता का परचम लहराया है, बल्कि अब राजनीतिक शुचिता का भी संदेश दिया है। लव जिहाद जैसे संवेदनशील मामले में निगम की सख्ती ने यह दिखाया कि आरोपित जनप्रतिनिधियों पर भी कार्रवाई से परहेज़ नहीं किया जाएगा। यह कदम शहर की जनता के बीच प्रशासन की साख को मजबूत करेगा और राजनीतिक जवाबदेही की नई मिसाल बनेगा। इस पूरी कार्रवाई के बाद इंदौर नगर निगम के कई पार्षदों ने कहा कि यह फैसला कानून के साथ-साथ समाज के नैतिक मूल्यों के अनुरूप है। वहीं कांग्रेस खेमे ने इसे “राजनीतिक साजिश” करार दिया है और कहा कि कादरी को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले दोषी ठहराना गलत है। नगर निगम प्रशासन ने हालांकि स्पष्ट कर दिया कि प्रस्ताव कानूनी प्रक्रिया से पारित किया गया है और अब अंतिम निर्णय राज्य शासन व निर्वाचन आयोग के स्तर पर होगा।


