सीजी भास्कर, 29 अक्टूबर। राजस्थान और आंध्र प्रदेश में हाल ही में बसों में लगी भीषण आग की घटनाओं के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने भी एहतियाती कदम उठाए हैं। (Bus Safety Inspection) के तहत राज्य परिवहन विभाग ने प्रदेश में चलने वाली सभी स्लीपर और एसी बसों की अनिवार्य सुरक्षा जांच का आदेश जारी किया है।
अधिकारियों ने बताया कि अब हर बस में फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकास (Emergency Exit) और इलेक्ट्रिकल वायरिंग सिस्टम की नियमित जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट अनिवार्य रूप से परिवहन विभाग को सौंपनी होगी।
बसों की सुरक्षा जांच अनिवार्य
राज्य में प्रतिदिन करीब 600 से अधिक स्लीपर और एसी बसें मध्यप्रदेश, ओडिशा, झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए संचालित होती हैं। इन बसों की कीमत 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक होती है और अधिकांश बस ऑपरेटर दावा करते हैं कि वाहनों में आधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि रियर इंजन बसों में आग लगने का खतरा अधिक होता है। हालांकि, छत्तीसगढ़ में इस श्रेणी की बसें सीमित संख्या में हैं। राज्य में अधिकतर बसें फ्रंट इंजन वाली हैं, फिर भी सभी ऑपरेटरों को वाहन की तकनीकी स्थिति की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बस मालिकों और ड्राइवरों को सख्त हिदायत
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सभी बस मालिकों, ऑपरेटरों और ड्राइवरों को फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यस्थिति की जांच करने, स्पार्किंग या शॉर्ट सर्किट जैसी तकनीकी गड़बड़ियों को तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
साथ ही, प्रत्येक बस में अग्निशमन यंत्रों की कार्यावधि, आपातकालीन दरवाजों की स्थिति और बिजली फिटिंग की सुरक्षा को जांचना अनिवार्य किया गया है। सभी बस डिपो और निरीक्षण केंद्रों को इस दिशा में तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्ट जल्द होगी प्रस्तुत
परिवहन विभाग ने कहा है कि सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को 10 दिनों के भीतर निरीक्षण रिपोर्ट मुख्यालय में जमा करनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर जिन बसों में सुरक्षा खामियां पाई जाएंगी, उनके परमिट अस्थायी रूप से निलंबित किए जा सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि हाल के हादसों से सबक लेते हुए यह निर्णय लिया गया है ताकि प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन यात्रा को और सुरक्षित बनाया जा सके।


