सीजी भास्कर, 30 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश (Compassionate Appointment Case) में विवाहित बेटी और उसकी मां द्वारा दायर अनुकंपा नियुक्ति की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के 11 वर्ष बाद दायर आवेदन कानूनी रूप से विलंबित है और इतने लंबे अंतराल में अनुकंपा नियुक्ति योजना का मूल उद्देश्य समाप्त हो जाता है। यह निर्णय एक लंबे समय से लंबित मामले में सुनाया गया, जो एसईसीएल के एसडीएल ऑपरेटर स्वर्गीय इंजार साय से जुड़ा था।
इंजार साय की मृत्यु 14 अगस्त 2006 को ड्यूटी के दौरान हुई थी। उनकी मृत्यु के बाद परिवार में उत्तराधिकार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इंजार साय की दो पत्नियां थीं। पहली पत्नी शांति देवी और दूसरी इंद्रकुंवर। वर्ष 2009 में एसईसीएल ने पहली पत्नी शांति देवी का आवेदन यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि दोनों पत्नियों के बीच विवाद अदालत में विचाराधीन है और जब तक निर्णय नहीं आता, अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
विवाद सिविल कोर्ट में वर्षों तक चलता रहा। इस बीच, दूसरी पत्नी इंद्रकुंवर ने 17 अप्रैल 2017 को अपनी विवाहित बेटी प्रवीण के नाम से अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment Case) के लिए आवेदन किया। एसईसीएल ने आवेदन यह कहते हुए ठुकरा दिया कि आवेदिका विवाहित है और आवेदन कर्मचारी की मृत्यु के 11 साल बाद दिया गया है, जिसका कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया।
एसईसीएल के इस निर्णय के खिलाफ मां-बेटी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने एनसीडब्ल्यूए के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारी की मृत्यु की तिथि से पांच वर्ष के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है। अदालत ने माना कि इतने वर्षों तक परिवार ने बिना किसी सरकारी सहायता के जीवनयापन किया, जिससे स्पष्ट है कि तत्काल राहत की आवश्यकता अब नहीं रही।
सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए दायर अपील पर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने भी याचिका को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य दिवंगत कर्मचारी के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता देना है, न कि वर्षों बाद रोजगार सुनिश्चित करना। इस फैसले को भविष्य के मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है।


