सीजी भास्कर, 15 जुलाई। खिलाड़ियों को अनजाने में डोपिंग नियमों के उल्लंघन से बचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (CSCS) ने रायपुर में एंटी-डोपिंग जागरूकता सेमिनार आयोजित किया। सेमिनार में करीब 200 क्रिकेटरों और सपोर्ट स्टाफ को प्रतिबंधित दवाओं, न्यूट्रिशन सप्लीमेंट, डोप टेस्टिंग प्रक्रिया और एंटी-डोपिंग नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई। (CSCS anti-doping seminar)
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कार्यक्रम (CSCS anti-doping seminar) में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) की विशेषज्ञ डॉ. नेहा सिंह ने खिलाड़ियों को बताया कि कई बार डॉक्टर की सलाह पर ली जाने वाली दवाओं या न्यूट्रिशन सप्लीमेंट में भी प्रतिबंधित तत्व मौजूद हो सकते हैं, जिससे खिलाड़ी अनजाने में डोपिंग नियमों के दायरे में आ सकते हैं। उन्होंने किसी भी दवा का सेवन करने से पहले उसकी जानकारी जांचने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी।
सेमिनार में खिलाड़ियों को बताया गया कि एंटी-डोपिंग नियमों में ‘स्ट्रिक्ट लाइबिलिटी’ का सिद्धांत लागू होता है। इसके तहत यदि किसी खिलाड़ी के शरीर में प्रतिबंधित पदार्थ पाया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी उसी खिलाड़ी की मानी जाती है, चाहे वह पदार्थ अनजाने में ही शरीर में पहुंचा हो।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि कोई भी न्यूट्रिशन सप्लीमेंट पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। कई मामलों में सप्लीमेंट्स में प्रतिबंधित पदार्थ मिलने या गलत लेबलिंग की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसलिए खिलाड़ियों को किसी भी सप्लीमेंट का उपयोग करने से पहले पूरी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान खिलाड़ियों को NADA के ‘नो योर मेडिसिन (KYM)’ प्लेटफॉर्म की जानकारी भी दी गई, (CSCS anti-doping seminar) जिसके माध्यम से वे किसी भी दवा की प्रतिबंधित स्थिति की जांच कर सकते हैं। साथ ही आयुर्वेदिक, हर्बल और अन्य सप्लीमेंट्स के इस्तेमाल में भी विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई।
क्रिकेट में डोपिंग के मामले अपेक्षाकृत कम सामने आते हैं, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त नियमों को देखते हुए राज्य क्रिकेट संघ खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही जागरूक करने पर जोर दे रहे हैं, ताकि जानकारी के अभाव में किसी खिलाड़ी का करियर प्रभावित न हो।
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