सीजी भास्कर, 15 नवंबर। खुले में पशुओं को रखने से न केवल सुरक्षा संबंधी जोखिम उत्पन्न होते थे, बल्कि दुग्ध उत्पादन एवं पशुसेवा (MNREGA Organic Farming Success Chhattisgarh) पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड के ग्राम पाढ़ी निवासी बुलबुलराम एक साधारण किसान हैं, जिनका जीवन-यापन मुख्य रूप से कृषि एवं गौवंशीय पशुपालन पर आधारित है। वे अधिक पशु पालन करना चाहते थे, परंतु उनके सामने सबसे बड़ी समस्या पशुओं को सुरक्षित एवं व्यवस्थित स्थान पर रखने के लिए पक्के शेड की अनुपलब्धता थी।
बुलबुलराम की यह समस्या तब दूर हुई जब उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) (MNREGA Organic Farming Success Chhattisgarh) के अंतर्गत 68 हजार रुपए की लागत से पशुशेड निर्माण की स्वीकृति मिली। इस स्वीकृति ने उन्हें पक्का शेड निर्माण के लिए वित्तीय सहयोग दिया और निर्माण कार्य के दौरान परिवार को स्थानीय रोजगार भी मिला।
पशुशेड निर्माण ने बुलबुलराम के जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया। अब उन्हें पशुओं को खुले में छोड़ने की आवश्यकता नहीं रही। सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण होने से पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ (MNREGA Organic Farming Success Chhattisgarh)। पक्का शेड उपलब्ध होने के बाद वे अधिक संख्या में पशु रखने में सक्षम हुए। इसके परिणामस्वरूप बछड़े एवं बछिया की संख्या बढ़ी, जिनका विक्रय कर उन्हें अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत प्राप्त हुआ।
पशुओं की बेहतर देखभाल से दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है। वर्तमान में प्रतिदिन 3 से 4 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। ग्रामीणजन उनके घर से ही दूध 35 से 40 रुपए प्रति लीटर के दर पर खरीदते हैं। इससे बुलबुलराम को प्रतिदिन लगभग 100 से 150 रुपए की नियमित आमदनी हो रही है। परिवार को शुद्ध एवं पौष्टिक दूध मिलने से स्वास्थ्य में भी सुधार आया।
आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद बुलबुलराम ने सामाजिक दायित्व निभाते हुए एक गौवंशीय पशु का दान भी किया। यह उनकी संवेदनशीलता और समुदाय के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
पशुशेड बनने से गोबर और गौमूत्र का व्यवस्थित संग्रह संभव हुआ, जिसका उपयोग वे अपनी बाड़ी (रसोई उद्यान) में जैविक खाद के रूप में कर रहे हैं (MNREGA Organic Farming Success Chhattisgarh 2025)। बिना रासायनिक खाद के वे विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। इन सब्जियों की गाँव में अच्छी मांग है, जिससे नियमित आय मिलती है। परिवार को शुद्ध और पौष्टिक सब्जियाँ घर पर ही उपलब्ध हो रही हैं, जिससे बाजार खर्च भी बच रहा है।
बुलबुलराम और उनका सात सदस्यीय परिवार इस बात का सजीव उदाहरण है कि महात्मा गांधी नरेगा जैसी योजनाएँ ग्रामीण जीवन में कैसे व्यक्तिगत संपत्ति निर्माण, आजीविका सशक्तिकरण, पशुधन संरक्षण और पर्यावरण हितैषी जीवनशैली को मजबूती देती हैं (MNREGA Organic Farming Success Chhattisgarh 2025)। पशुशेड निर्माण ने उन्हें आत्मनिर्भर पशुपालक, सफल दुग्ध उत्पादक और जैविक सब्जी उत्पादक बना दिया है। आज वे दूध विक्रय, पशु विक्रय, जैविक सब्जी विक्रय और गौवंशीय वृद्धि—चार स्थायी आय स्रोतों का सृजन कर चुके हैं।
यह सफलता कहानी साबित करती है कि मनरेगा केवल मजदूरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी संपत्ति निर्माण, शून्य अपशिष्ट प्रबंधन और आजीविका उन्नयन की मजबूत आधारशिला है।


