सीजी भास्कर 16 नवंबर Fake Currency Bhopal: करोंद इलाके में दबिश, पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी
मध्य प्रदेश की राजधानी में नकली नोटों (Fake Currency) का खेल कितने शांत तरीके से चल रहा था, इसका अंदाजा तब लगा जब करोंद क्षेत्र में रहने वाले एक युवक के ठिकाने पर पुलिस ने अचानक छापा मारा। मात्र 10वीं पास विवेक यादव के घर से जो बरामद हुआ, उसने जांच टीम तक को हैरान कर दिया—500 के नोटों की मोटी गड्डियां, कटिंग टूल्स, स्पेशल पेपर और ऐसा पूरा सेटअप जो किसी प्रोफेशनल प्रिंटिंग यूनिट जैसा दिखता था।
Fake Currency Bhopal: जर्मन राइटर्स की किताबें बनीं अपराध की ‘टेक्स्टबुक’
जांच में सामने आया कि आरोपी कोई हाईटेक ट्रेनिंग लेकर ये सब नहीं कर रहा था, बल्कि जर्मन राइटर्स की कुछ स्पेशल बुक्स—जिनमें सिक्योरिटी पेपर, माइक्रो प्रिंटिंग और नोट टेक्चर जैसी चीज़ें शामिल थीं—उन्हीं को पढ़कर उसने यह पूरा सिस्टम खड़ा किया। पुलिस के अनुसार उसने जो रॉ मटेरियल खरीदा था, उसकी कीमत ही लाखों में थी।
यहां तक कि उसने नोटों के Texture Simulation की तकनीक भी इंटरनेट और विदेशी लेखकों की पुस्तकों से ही समझी थी।
Fake Currency Bhopal: घर से मिला करोड़ों छापने लायक रॉ मटेरियल
तलाशी के दौरान पुलिस टीम को ऐसी सामग्री और उपकरण मिले, जिनसे करीब 30 लाख रुपए से ज्यादा के नकली नोट और बनाए जा सकते थे। कमरे में लगे प्रिंटर, मोटे साइज के पेपर, विशेष प्रकार की इंक और कटिंग मशीनें देखकर पुलिस ने तुरंत पूरा सेटअप सील कर दिया।
अधिकारियों के अनुसार, यह कोई एक-दो दिन का काम नहीं था। आरोपी महीनों से अपनी ‘फेक करेंसी फैक्ट्री’ (Fake Note Setup) को परफेक्ट बनाने में लगा था।
Fake Currency Bhopal: ऐसा नहीं कि वह सिर्फ छापता था, बाजार में चलाता भी था
पूछताछ में विवेक ने स्वीकार किया कि उसने अब तक 5–6 लाख रुपए तक की नकली करेंसी बाजार में खपा दी है। उसकी रणनीति बेहद सीधी थी—किराए के घर से दूर की दुकानों में जाता, 500 का फर्जी नोट देता और बदले में असली खुल्ले लेकर निकल जाता।
उसकी सबसे बड़ी चालचलन यह थी कि वह कभी एक ही दुकान पर दोबारा नहीं जाता था, जिससे शक कम हो जाता था। यह “Circulation Tactic ” पुलिस रिकॉर्ड में कम ही देखने को मिलती है।
Fake Currency Bhopal: ‘लो प्रोफाइल’ लाइफस्टाइल, लेकिन हाई लेवल सेटअप
आरोपी विवेक यादव मूल रूप से यूपी का रहने वाला है और प्रिंटिंग व ग्राफिक संबंधी काम से लंबे समय से जुड़ा हुआ था। भोपाल में वह करोंद के किराए के कमरे में अकेला रहता था, लेकिन अंदर वह एक ऐसा नेटवर्क तैयार कर चुका था जिसकी भनक भी आसपास के लोगों को नहीं लगी।
पुलिस को शक है कि वह इस काम में अकेला नहीं था और जल्द ही इससे जुड़े अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।
Fake Currency Bhopal: आगे क्या?—जांच टीम करेगी बड़े नेटवर्क की पड़ताल
फिलहाल आरोपी हिरासत में है और पुलिस उसकी डिजिटल ट्रांजैक्शंस, ऑनलाइन खरीदे गए उपकरण और संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार मामला सिर्फ एक युवक तक सीमित नहीं है।
पुलिस का कहना है कि शहर में छोटे स्तर पर चल रही फेक करेंसी की शिकायतें पहले भी मिलती रही हैं, लेकिन इतना संगठित सेटअप (Organized Counterfeit System ) पहली बार सामने आया है।


