सीजी भास्कर 16 नवंबर लाल किले के पास हुए (Delhi Blast Probe) में जांच टीम को ऐसे सुराग मिले हैं, जो अब पूरे मामले का एंगल बदल सकते हैं. घटनास्थल से 9mm कैलिबर के तीन कारतूस मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. दो कारतूस जिंदा हैं और एक खाली खोखा, जबकि वहां किसी भी प्रकार की पिस्टल या उससे जुड़े पार्ट्स नहीं मिले. यह बात सुरक्षा एजेंसियों को हैरान कर रही है कि हथियार गायब है लेकिन कारतूस मौके पर मौजूद हैं.
Delhi Blast Probe – कारतूस की उत्पत्ति पर सवाल
जांच टीम ने अपने स्टाफ तक की मैगजीन चेक करवाई, पर किसी भी पुलिसकर्मी के कारतूस मिसिंग नहीं मिले. ऐसे में यह आशंका और गहरी हो गई है कि ये कारतूस ब्लास्ट के बाद i20 कार से भी गिर सकते हैं या किसी बाहरी शख्स की मौजूदगी से जुड़े हो सकते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक 9mm कैलिबर आम लोगों के पास नहीं होता, इसे आमतौर पर सुरक्षा बल ही उपयोग करते हैं, जिससे जांच का दायरा और बढ़ गया है.
Terror Funding – हवाला कनेक्शन का नया एंगल
जांच एजेंसियां इस बात की भी गहराई से जांच कर रही हैं कि क्या इस मॉड्यूल को फंड करने के लिए (Terror Funding) का इस्तेमाल हुआ था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी उमर तक करीब 20 लाख रुपये अवैध चैनल के जरिए पहुंचे थे. हवाला से जुड़े कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है. टीम को यह भी पता चला है कि आरोपी डॉक्टरों ने नूंह के बाजार से बड़ी मात्रा में फर्टिलाइज़र कैश में खरीदा था, जिससे शक और बढ़ गया है.
White Collar Link – 200 से ज्यादा डॉक्टरों पर निगरानी
खुफिया एजेंसियां अब इस पूरे मॉड्यूल के (White Collar Link) को खंगालने में जुटी हैं. देशभर के 200 से ज्यादा डॉक्टरों पर नजर रखी जा रही है, जो उमर और शाहीन के संपर्क में आए थे. कई डॉक्टरों के फोन लगातार बंद मिल रहे हैं, जिससे जांच का दायरा और विस्तृत हो गया है. कुछ को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है ताकि इस नेटवर्क का पूरा ढांचा सामने आ सके.
Blast Module – जांच का अगला चरण
एजेंसियां अब इस पूरे (Blast Module) में शामिल लोगों की भूमिका को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं. कार में विस्फोट कैसे हुआ, कारतूस वहां कैसे पहुंचे, और वित्तीय लेनदेन किस चैनल से बहा – इन सभी सवालों के जवाब मिलना बाकी है. जांच टीमें तकनीकी और फोरेंसिक एंगल से भी तेजी से काम कर रही हैं.





