सीजी भास्कर, 17 नवंबर। पड़ोसी देश बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल – बांग्लादेश (ICT-BD) ने सोमवार को मौत की सजा सुनाई। खास बात यह है कि जिस कोर्ट ने शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई, उसकी स्थापना खुद उन्होंने की थी।
Sheikh Hasina Death Penalty 2010 में बना था ICT
बांग्लादेश में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) को साल 2010 में बनाया गया था। इसकी स्थापना का उद्देश्य 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय हुए युद्ध अपराधों और नरसंहार जैसे मामलों की जांच और उसके दोषियों को सजा देना था। आईसीटी के निर्माण के लिए तो वैसे 1973 में कानून बना दिया गया था लेकिन सियासी कारणों से करीब 3 दशक तक इसकी प्रक्रिया रुकी रही। फिर साल 2010 में तत्कालीन पीएम शेख हसीना ने इसकी स्थापना कराई।
‘नहीं सुना गया मेरा पक्ष’ – शेख हसीना
उधर, शेख हसीना ने ICT के फैसले पर कहा, “मेरा पक्ष सुना बिना यह फैसला दिया गया। यह निर्णय ऐसे ट्रिब्यूनल ने सुनाया है जिसे एक गैर निर्वाचित सरकार चला रही है। उनके पास जनता का कोई जनादेश नहीं है। ये पूरी तरह से गलत है।”
हसीना ने आगे कहा, “यह फैसले पहले से निर्धारित था। मुझे न अपना पक्ष रखने का और न ही अपने वकील से प्रतिनिधित्व करवाने का मौका दिया गया। ICT में कुछ भी इंटरनेशनल नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट सिर्फ हमारी पार्टी (अवामी लीग) के मेंबर्स पर केस चलाया, जबकि राजनीतिक विरोधियों के द्वारा की गई हिंसा को नजरअंदाज कर दिया गया।
बता दें कि कोर्ट ने शेख हसीना को पिछले साल जुलाई में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया है। इसके साथ ही हसीना की पार्टी के वरिष्ठ नेता और उनकी सरकार में गृह मंत्री रहे असदुज्जमान खान को भी कोर्ट ने सह-आरोपी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों की संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है।






