सीजी भास्कर, 18 नवंबर |Child Labour Raid बड़ी छापेमारी में क्या मिला?
सोमवार दोपहर राजधानी रायपुर में Child Labour Raid के दौरान दो अलग-अलग फैक्ट्रियों में वह तस्वीर सामने आई जिसने पूरे प्रशासन को चौकन्ना कर दिया। सड्डू की एक बिस्किट यूनिट और खरोरा की एक मशरूम फैक्ट्री के भीतर 109 नाबालिग बच्चे काम करते मिले—जिनमें 68 लड़कियां और 41 लड़के शामिल हैं।
जांच में सामने आया कि अधिकांश बच्चे उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से यहां लाए गए थे।
Child Labour Raid : रेस्क्यू ऑपरेशन कैसे चला?
टीम ने फैक्ट्रियों के अंदर प्रवेश करते ही उत्पादन पूरी तरह रोक दिया और सबसे पहले बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
सभी 109 बच्चों को बसों से शहर लाकर अलग-अलग सेंटरों में रखा गया है, जहां उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
सुरक्षा के मद्देनज़र बालिकाओं और बालकों को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया है।
Child Labour Violation जुलाई की घटनाओं का कनेक्शन क्या है?
इसी फैक्ट्री पर जुलाई में भी जांच की कार्रवाई हुई थी। उस समय भी कई नाबालिग मजदूर मिले थे, जिन्हें छुड़ाकर घर भेजा गया था।
लेकिन तब किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
बच्चों से जबरन लंबे समय तक काम करवाना, मजदूरी रोककर रखना और दुर्व्यवहार जैसी बातें उस समय भी उजागर हुई थीं।
शिकायतों की अनदेखी के बाद दोबारा जांच क्यों हुई?
पिछले कुछ महीनों में लगातार शिकायतें मिलती रहीं कि कार्यस्थल पर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार होता है।
फैक्ट्री परिसर में रहने और खाने की स्थिति भी बेहद खराब बताई गई।
इन शिकायतों को देखते हुए Child Labour Investigation को दोबारा शुरू किया गया, जो सोमवार को बड़े एक्शन में बदल गया।
बच्चों की उम्र, डॉक्यूमेंट और माता–पिता की जांच
बच्चों के माता-पिता से संपर्क कर उनकी पहचान, उम्र और रोजगार की स्थिति की पुष्टि की जा रही है।
कई बच्चों के पास कोई दस्तावेज ही नहीं मिला, जबकि कुछ ने बताया कि उन्हें कम उम्र में ही काम पर भेज दिया गया था।
शहर में मौजूद चाइल्ड केयर संगठनों के सदस्य भी जांच में शामिल हैं।
Child Protection Law कानून क्या कहता है?
बाल श्रम कानून के अनुसार:
- 14 साल से कम उम्र के बच्चों से कोई काम नहीं कराया जा सकता।
- 14 से 18 वर्ष के किशोर खतरनाक स्थानों पर काम नहीं कर सकते।
- कानून तोड़ने पर नियोक्ता को दो साल तक की कैद या ₹50,000 तक का जुर्माना हो सकता है।
फैक्ट्री में काम का माहौल असुरक्षित और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा पाया गया, जिसके कारण दोनों यूनिटों को जांच पूरी होने तक बंद कर दिया गया है।
आगे क्या होगा?
प्रशासन अब बच्चों के परिवारों से बातचीत करेगा और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाएगी।
फैक्ट्रियों के सभी दस्तावेज, मशीनों के संचालन और वर्कफोर्स के रिकॉर्ड का परीक्षण किया जा रहा है।
जिसके बाद जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।





