सीहोर जिले के आष्टा स्थित VIT कॉलेज में मंगलवार रात अचानक हालात बिगड़ गए। मेस के खराब खाने, बदबूदार पानी और लंबे समय से अनदेखी हो रही शिकायतों ने छात्रों के भीतर इतना दबाव जमा दिया था कि देर रात यह सब “VIT Hostel Protest ” का रूप ले बैठा।
कई विद्यार्थियों ने बताया कि खाने में बार-बार की गड़बड़—कभी कच्ची दाल, कभी खराब सब्ज़ी—और पीने के पानी में अजीब स्वाद, जैसे किसी पुराने पाइप का धात्विक अवशेष, उनकी दिनचर्या को लगातार प्रभावित कर रहे थे।
हजारों छात्रों का हुजूम और उग्र माहौल
रात बढ़ी तो सिर्फ आवाज़ें ही नहीं बढ़ीं—छात्रों की संख्या भी तेजी से बढ़ती गई। चंद मिनटों में करीब चार हजार से अधिक छात्र एक साथ मैदान की ओर निकल आए, और छोटा-सा विरोध एक बड़ी भीड़ की गूंज में बदल गया।
गुस्से में छात्रों ने हॉस्टल और परिसर के कई हिस्सों में तोड़फोड़ की। एक बस, कई कारें, एक एम्बुलेंस, RO संयंत्र और हॉस्टल की खिड़कियां इस उग्र विरोध का निशाना बनीं। कुछ गाड़ियों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं, और धुआं रातभर हवा में तैरता रहा—जैसे कोई चेतावनी-सा संदेश।
प्रशासन की रातभर तैनाती—सड़क से हॉस्टल तक बैरिकेड
भीड़ का आकार और गुस्सा देखते हुए रात 11 बजे के आसपास प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम और संबंधित थानों का बल मौके पर पहुंचा। कई रास्तों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, ताकि विरोध को कैंपस के बाहर फैलने से रोका जा सके।
पुलिस ने समझाइश का तरीका अपनाया—बल प्रयोग के बिना, बातचीत और समूह-वार संवाद के जरिए भीड़ को शांत किया गया। देर रात 3 बजे के आसपास हालात नियंत्रित होते दिखे, हालांकि बैरिकेड्स और अतिरिक्त बल सुबह तक मौके पर डटे रहे।
दूषित पानी, बढ़ती बीमारियां… और गुपचुप भर्ती का आरोप
हंगामे के बीच एक और दावा लगातार सामने आता रहा—कि कई छात्र पीलिया जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं और हॉस्टल के RO में लंबे समय से गंभीर समस्या थी।
कुछ छात्रों का कहना है कि बीमारी बढ़ने पर प्रबंधन ने कुछ विद्यार्थियों को चुपचाप, बिना परिवार को बताए, भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। इसी आरोप ने माहौल को और भड़का दिया और “water contamination” चर्चा का केंद्र बन गया।
मृत्यु की अफवाह और प्रशासन का देर रात स्पष्टीकरण
इसी दौरान सोशल मीडिया पर अचानक यह खबर फैली कि दूषित पानी के कारण एक छात्र की मृत्यु हो गई। इस दावे ने विरोध के तापमान को और चढ़ा दिया।
रजिस्ट्रार ने रात करीब 1:45 बजे स्पष्टीकरण जारी किया कि यह खबर अफवाह है, पूरी तरह झूठी है, और “Hostel Crisis” को भटकाने वाली है।
उन्होंने छात्रों से निवेदन किया कि वे बिना पुष्टि की जानकारी पर विश्वास न करें।
कॉलेज बंद, जांच शुरू—मगर सवालों का पहाड़ जस का तस
हंगामे के बाद कॉलेज ने 30 नवंबर तक अवकाश घोषित कर दिया। साथ ही प्रशासन ने बीमार छात्रों की सूची बनाना शुरू किया है, ताकि स्वास्थ्य विभाग अलग से जांच कर सके।
बुधवार को छात्र प्रतिनिधियों, प्रबंधन और जिला प्रशासन के बीच त्रिपक्षीय बैठक में मेस क्वालिटी, RO मेंटेनेंस, मेडिकल मॉनिटरिंग, सुरक्षा व्यवस्था और हॉस्टल स्टाफ के व्यवहार जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
विशेषज्ञों की राय—यह सिर्फ भोजन नहीं, लंबे समय से जमा असंतोष का बिग-ब्लास्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विरोध सिर्फ एक दिन की प्रतिक्रिया नहीं थी—यह महीनों से जमा नाराज़गी, उपेक्षित शिकायतें और टूटे भरोसे की संयुक्त प्रतिक्रिया थी।
छात्र अब स्थायी समाधान चाहते हैं—साफ पानी, भरोसेमंद मेस, पारदर्शी स्वास्थ्य जांच और हॉस्टल प्रबंधन की जवाबदेही।





