चाणक्य नीति में उल्लेख मिलता है कि मां लक्ष्मी (Chanakya Lakshmi Blessings) उन घरों की ओर सहज रूप से आकर्षित होती हैं, जहां योग्य और सद्गुणी लोगों का सम्मान किया जाता है। छत्तीसगढ़ के कई पारंपरिक परिवार आज भी इस मान्यता को व्यवहार में जीते हैं—जहां विनम्रता, उदारता और धर्मपरायणता घर का मूल स्वभाव होता है। चाणक्य के अनुसार ऐसे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा टिकती है और धन का प्रवाह बाधित नहीं होता।
प्रेम और सौहार्द वाले घरों में आता है स्थायी धन
नीति शास्त्र का यह स्पष्ट मत है कि जिस परिवार में आपसी प्रेम, एकता और शांति बनी रहती है, वहां लक्ष्मी का वास स्थायी रूप से होता है।
घरों की आर्थिक स्थिति अक्सर वहीं बिगड़ती है, जहां प्रतिदिन कलह, तनाव या कटुता का माहौल हो। कई छत्तीसगढ़िया परिवारों में यह बात पीढ़ियों से कही जाती है कि घर का वातावरण संपन्नता का प्रथम द्वार होता है, और चाणक्य की यह बात आज भी उतनी ही सार्थक है—शांति हो तो अवसर खुद रास्ता ढूंढ लेते हैं।
Chanakya Lakshmi Blessings: अन्न का आदर है घर की बरक्कत का मूल आधार
चाणक्य नीति में अन्न के सम्मान को समृद्धि का आधार बताया गया है। (Respect for Food)
जिन घरों में भोजन को बर्बाद नहीं किया जाता, जहां अन्न को कृतज्ञ भाव से ग्रहण किया जाता है, वहां कभी अभाव नहीं आता। छत्तीसगढ़ में अन्न की पूजा की परंपरा पुरानी है—धान का कटोरा, हाथ जोड़कर भोजन ग्रहण करना और बचा हुआ भोजन जरूरतमंद को देना—ये सब परंपराएं सीधे-सीधे समृद्धि से जुड़ी मानी जाती हैं। चाणक्य भी कहते हैं कि जहां अन्न का सम्मान होता है, वहां व्यापार, नौकरी और आर्थिक अवसरों में निरंतर उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
Chanakya Lakshmi Blessings: संस्कार, व्यवहार और वातावरण से बनती है समृद्धि
चाणक्य के अनुसार मां लक्ष्मी सिर्फ धन की देवी नहीं, बल्कि संपन्नता की ऊर्जा (Wealth Harmony) का स्वरूप हैं। वह घर तभी स्थायी रूप से कृपा करती हैं, जहां सम्मान, प्रेम और अन्न के प्रति आदर तीनों उपस्थित हों।
छत्तीसगढ़ के अनेक परिवार इस सिद्धांत को सहज रूप से अपनाए हुए हैं। यहां समृद्धि को केवल धन नहीं, बल्कि व्यवहार, वातावरण और पारिवारिक संस्कारों के संतुलन से परिभाषित किया जाता है—और यहीं चाणक्य नीति का सार पूरी तरह दिखाई देता है।
