सीजी भास्कर, 30 नवंबर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने राज्यों की वित्तीय पारदर्शिता और आय-व्यय प्रणाली में एक बड़ा सुधार लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सभी राज्य सरकारों को अपने आय-व्यय का संपूर्ण ब्योरा पूरी तरह डिजिटल प्रणाली के माध्यम से और निर्धारित समय-सीमा के भीतर सीएजी को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
यह नई व्यवस्था (CAG Financial Reform) 2027-28 से पूरे देश में लागू की जाएगी, जिससे व्यय के वर्गीकरण का एक समान राष्ट्रीय मानक अस्तित्व में आएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम से देशभर में वित्तीय समानता को मजबूती मिलेगी और सुशासन की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
सीएजी के डिप्टी कंट्रोलर जनरल जयंत सिन्हा ने बताया कि वर्तमान में अलग-अलग राज्य खर्च और राजस्व को अपने अनुसार वर्गीकृत करते हैं, जिसके कारण एक राज्य की वित्तीय स्थिति की दूसरे राज्य या केंद्र से तुलना करना कठिन होता है। इस समस्या को समाप्त करने के लिए 11 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना में सभी 28 राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि 2027-28 से एक समान विस्तृत व्यय वर्गीकरण अपनाया जाए।
इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, पूंजीगत परियोजनाओं और सामाजिक योजनाओं पर होने वाले खर्च की स्पष्ट और सटीक तुलना संभव हो सकेगी। यह सुधार (CAG Financial Reform) राज्यों की आर्थिक क्षमता और वित्तीय अनुशासन मापने में नई पारदर्शिता लाएगा।
दूसरी बड़ी व्यवस्था लेखा प्रस्तुतिकरण की डिजिटल और समयबद्ध प्रणाली है। इसके तहत सभी राज्यों को प्रत्येक माह का सिविल अकाउंट अगले महीने की 10 तारीख तक तथा वार्षिक वित्त लेखा एवं विनियोग लेखा 30 सितंबर तक पीएफएमएस पोर्टल पर डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अपलोड करना होगा।
कागज की प्रति भेजने की दशकों पुरानी व्यवस्था समाप्त कर दी जा रही है। देरी पर राज्यों के कंसोलिडेटेड फंड से आर्थिक दंड काटने का प्रावधान भी लागू कर दिया गया है, जो (CAG Financial Reform) के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करेगा।
सीएजी अधिकारियों का कहना है कि ये सुधार मिलकर देश के सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में क्रांति लाएंगे। अनुमान है कि 2028-29 तक सभी राज्यों के कुल व्यय डाटा के 98 प्रतिशत हिस्से का तुलनात्मक अध्ययन संभव होगा, जिससे राज्यों के विकास में मौजूद असमानताओं को तेजी से कम करने में मदद मिलेगी।
साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, वेतन, अनुदान और पूंजीगत व्यय जैसे प्रमुख मदों की सटीक तुलना से यह स्पष्ट होगा कि कौन-सा राज्य अपने बजट का बेहतर और प्रभावी उपयोग कर रहा है तथा किसे सुधार की आवश्यकता है।
