सीजी भास्कर, 30 नवम्बर। किसानों के लिए आय में वृद्धि का नया अध्याय पीएम-आशा योजना (PM-Aasha Scheme) देश में दलहन–तिलहन उत्पादन को सशक्त बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दलहन एवं तिलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ देश को दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।
सरकार का उद्देश्य है कि किसानों से दलहनी और तिलहनी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय सुनिश्चित किया जाए, जिससे उन्हें अपनी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके (PM-Aasha Scheme)। योजना तीन मुख्य घटकों मूल्य समर्थन योजना (PSS), मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) और मूल्य घाटा भुगतान योजना (PDPS)—के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही है।
इस योजनांतर्गत राज्य में उत्पादित अरहर, उड़द एवं मसूर का शत-प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जबकि मूंग, मूंगफली, सोयाबीन, चना और सरसों का 25 प्रतिशत उपार्जन नाफेड एवं एनसीसीएफ जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा किया जाएगा। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य न केवल दाल उत्पादन बढ़ाना है बल्कि किसानों की आमदनी को मजबूत करना भी है (PM-Aasha Scheme)।
किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत बनाएगी योजना
योजना किसानों की आर्थिक सुरक्षा को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है। सरकार चाहती है कि दाल उत्पादन में लगे किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिले और उनकी फसल का समय पर उपार्जन सुनिश्चित हो।
बलौदाबाजार जिले में 5 उपार्जन केंद्र
पीएम-आशा के तहत प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के लिए बलौदाबाजार जिले में पांच उपार्जन केंद्र अधिसूचित किए गए हैं—बलौदाबाजार, अमेरा, धुर्राबांधा, कसडोल और सिमगा।
पंजीयन अनिवार्य
योजना का लाभ पाने के लिए किसान को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा तथा निकटतम उपार्जन केंद्र का चयन करना होगा। प्रत्येक फसल के लिए 90 दिनों की उपार्जन अवधि निर्धारित की गई है। इस व्यवस्था से किसानों को न केवल एमएसपी पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा, बल्कि बाजार प्रतिस्पर्धा के कारण बेहतर मूल्य भी प्राप्त हो सकेगा।
