रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर से शुरू हो रहा है और इस बार सदन में कई अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा की उम्मीद है। सत्र के पहले ही दिन सरकार की ओर से विजन 2047 (Vision 2047) का प्रस्तुतीकरण रखा गया है, जिसमें अगले दो दशकों के विकास एजेंडा, प्रशासनिक सुधारों और दीर्घकालिक योजनाओं की दिशा तय की जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि पूरा सदन इस विषय पर अलग-अलग दृष्टिकोणों से विमर्श करेगा।
धर्मांतरण पर सख्त कानून का मसौदा तैयार
राज्य में जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी के जरिए किए जा रहे धर्मांतरण की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए सरकार ने शीतकालीन सत्र में एक कठोर मतांतरण-विरोधी विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह बिल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा घोषित प्राथमिकता परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह नया Anti-Conversion Bill (Vision 2047) राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा और सामाजिक तनाव को कम करने की दिशा में निर्णायक कदम माना जाएगा।
17 नए प्रावधान, 10 साल तक की सजा
नए विधेयक के 5-पृष्ठीय मसौदे में कुल 17 महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़े गए हैं। इनमें—
- प्रलोभन आधारित धर्मांतरण,
- मानसिक या शारीरिक दबाव,
- धोखाधड़ी या बहकावे से किए गए कन्वर्ज़न
को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
प्रस्तावित सज़ा—10 वर्ष तक की कैद और आवश्यकतानुसार आर्थिक दंड।
यह कानून मौजूदा 1968 के धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की जगह लेगा, जिसमें अधिकतम सजा सिर्फ 1 वर्ष और 5,000 रुपये का जुर्माना था।
क्यों ज़रूरी हुआ ये सख्त कदम?
राज्य के कई आदिवासी बहुल जिलों—बस्तर, जशपुर और रायगढ़—में वर्षों से forced conversion (Vision 2047) को लेकर विवाद बढ़ता रहा है। कई बार ये मामले सामाजिक टकराव और गुटीय संघर्ष में बदल गए, जिससे स्थानीय शांति प्रभावित हुई।
अधिकारियों का कहना है कि नया कानून इन्हीं संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने और समाज में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।
विजन 2047 और नए कानून का आपसी संबंध
सरकार का मानना है कि राज्य के विकास मॉडल में सामाजिक सौहार्द, धार्मिक स्वतंत्रता और आंतरिक स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण तत्व हैं।
इस वजह से, विजन 2047 में आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के साथ-साथ सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दी गई है।
नया विधेयक इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।




