सीजी भास्कर 8 दिसम्बर Naxal Surrender in MMC Zone: छत्तीसगढ़ के दूरस्थ बकरकट्टा इलाके में आज तड़के जो दृश्य सामने आया, वह लंबे समय से नक्सल हिंसा झेल रहे MMC ज़ोन के लिए राहत की सबसे बड़ी खबर बन गया। 1 करोड़ के इनामी और सेंट्रल कमेटी मेम्बर रामधेर मज्जी ने अपने 11 साथियों के साथ औपचारिक रूप से सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
(Naxal Surrender) शब्द अब एक नई कहानी बयां कर रहा है—एक ऐसे मोड़ की, जहां तीन राज्यों में फैला यह ज़ोन आखिरकार नक्सलमुक्त घोषित किया गया।
MMC Zone अब नक्सल मुक्त, मज्जी का सरेंडर बना निर्णायक मोड़
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मज्जी वह नाम था जिसे वर्षों से हिडमा का समानांतर माना जाता रहा। उसकी सक्रियता सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी, बल्कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती बेल्ट में उसकी गहरी पकड़ थी। उसके आत्मसमर्पण के बाद MMC Zone (MMC Zone) से लेकर ऊपरी कमान तक एक बड़ा बदलाव दर्ज किया जा रहा है। इस सरेंडर के साथ, इस पूरे क्षेत्र को नक्सलमुक्त घोषित कर दिया गया है—यह बात वर्षों की लड़ाई का सार अपने भीतर समेटे हुए है।
Naxal Surrender in MMC Zone: हथियारों का भारी जखीरा, खतरनाक कैडरों की लिस्ट भी जारी
सरेंडर के साथ ही पुलिस को कई तरह के हथियार मिले जिनमें AK-47, 30 कार्बाइन, इंसास, SLR और .303 राइफलें शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों की लिस्ट भी जारी की गई है, जिसमें अलग-अलग रैंक के माओवादी कैडर शामिल हैं—
- रामधर मज्जी – CCM – AK-47
- चंदू उसेंडी – DVCM – 30 कार्बाइन
- ललिता – DVCM
- जानकी – DVCM – INSAS
- प्रेम – DVCM – AK-47
- रामसिंह दादा – ACM – .303
- सुकेश पोट्टम – ACM – AK-47
- लक्ष्मी – PM – INSAS
- शीला – PM – INSAS
- सागर – PM – SLR
- कविता – PM – .303
- योगिता – PM – बिना हथियार
Naxal Surrender in MMC Zone: यह लिस्ट इस बात का संकेत है कि सरेंडर सिर्फ औपचारिक नहीं है, बल्कि माओवादी ढांचे के कई अहम स्तरों पर एक साथ गिरावट आई है।
हिडमा के एनकाउंटर के बाद दूसरा सबसे बड़ा झटका नक्सल संगठन को
पिछले महीने हुए हिडमा एनकाउंटर (Hidma Encounter) ने नक्सल संगठन की जड़ें पहले ही हिला दी थीं। हिडमा PLGA बटालियन-1 का प्रमुख था और 26 से अधिक बड़े हमलों का सूत्रधार। मारेदुमिल्ली जंगल में हुई उस मुठभेड़ में उसकी पत्नी सहित छह नक्सली ढेर हो गए थे। सुरक्षाबलों का मानना है कि हिडमा की मौत और अब मज्जी का सरेंडर—इन दो घटनाओं ने माओवादी संगठन को रणनीतिक स्तर पर भारी नुकसान पहुंचाया है।
क्षेत्र में शांति की उम्मीद, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
MMC बेल्ट में वर्षों बाद एक ऐसा समय आया है जब नक्सल मूवमेंट की रीढ़ एक साथ टूटती दिख रही है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि भले ही इस ज़ोन में नक्सल संरचना लगभग समाप्त हो चुकी हो, लेकिन सतर्कता में कोई कमी नहीं लाई जाएगी। ग्रामीण इलाकों में विश्वास बहाली से लेकर विकास का पहिया तेज करने तक, कई योजनाएं भी तेज़ी से आगे बढ़ाने की बात कही जा रही है।






