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Dpi New Circula : अब कुत्तों के बाद सांप-बिच्छुओं की रोकथाम भी टीचर्स की ड्यूटी, आदेश पर बढ़ी नाराज़गी

By Newsdesk Admin
11/12/2025
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Dpi New Circula
Dpi New Circula

सीजी भास्कर, 11 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के कामकाज (Dpi New Circula) की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। नवीनतम निर्देश में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने शिक्षकों को आवारा कुत्तों की निगरानी के साथ-साथ अब सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं पर भी विशेष ध्यान देने को कहा है।

Contents
  • “हमारी सुरक्षा कौन करेगा?”—टीचर्स एसोसिएशन का सवाल
  • स्कूल में दुर्घटना हुई तो सीधी जवाबदेही शिक्षक पर
  • 18 दिन में दूसरा आदेश
  • DEO की टिप्पणी—“SC का आदेश, पालन करना ही होगा”

स्कूल परिसर में कोई भी विषैला जीव न आए, इसकी जवाबदेही सीधे प्राचार्य और स्टाफ पर होगी। आदेश जारी होते ही शिक्षकों और संघों में नाराज़गी खुलकर सामने आ गई है।

DPI की ओर से जारी इस पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया है। आदेश सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों और प्रधान पाठकों तक पहुंच (Dpi New Circula) चुका है। कई स्कूल प्रमुखों ने इसे “व्यवहारिक रूप से असंभव” जिम्मेदारी बताया। उनका कहना है कि शिक्षकों के ऊपर पहले ही अनेक प्रशासनिक कार्यों का बोझ है, ऐसे में जान जोखिम में डालकर सर्प-विच्छु पकड़ने जैसे काम जोड़ना उचित नहीं।

“हमारी सुरक्षा कौन करेगा?”—टीचर्स एसोसिएशन का सवाल

टीचर्स एसोसिएशन ने खुलकर कहा है कि सांप-बिच्छुओं की रोकथाम की जिम्मेदारी देने से शिक्षकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि स्कूल परिसरों में ऐसे जीवों का आना असामान्य नहीं है, लेकिन उन्हें रोकना प्रशिक्षित कर्मियों का काम है। “सरकार को शिक्षकों की गरिमा और सुरक्षा—दोनों का ध्यान रखना चाहिए।”

इधर प्राचार्य-हेडमास्टरों का कहना है कि पहले से उन्हें SIR, आधार (Dpi New Circula) आईडी, जाति प्रमाणपत्र, मध्याह्न भोजन की निगरानी, स्मार्ट कार्ड, अभिभावक संपर्क, स्कूल रिक्तियों का फॉलो-अप और परीक्षाओं से जुड़े रिकॉर्ड संभालने जैसी जिम्मेदारियाँ दी गई हैं। अब नए आदेश के बाद शिक्षकों का मूल काम—पढ़ाना—सबसे अधिक प्रभावित होगा।

स्कूल में दुर्घटना हुई तो सीधी जवाबदेही शिक्षक पर

आदेश में यह भी जोड़ा गया है कि यदि बच्चे खेलते-खेलते नदी, तालाब या किसी जोखिमपूर्ण इलाके में चले जाते हैं और कोई घटना हो जाती है, तो सीधे शिक्षकों व प्राचार्य को जिम्मेदार माना जाएगा।

विद्यालय भवन की जर्जर अवस्था से छात्रों को चोट लगने की स्थिति में भी दोष शिक्षकों पर ही आएगा।

इसी क्रम में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता खराब मिलने पर कार्रवाई फिर से शिक्षकों पर तय की गई है। कई विद्यालयों में स्टाफ पहले ही यह सवाल उठा चुका है कि स्कूल भवन, सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता जैसी व्यवस्थाएँ मूलतः प्रशासनिक हैं—पर जिम्मेदारी शिक्षकों पर डाली जा रही है।

18 दिन में दूसरा आदेश

DPI ने 20 नवंबर को कुत्तों और मवेशियों को परिसर से दूर रखने संबंधी आदेश जारी किया था। उसके केवल 18 दिन बाद यह नया निर्देश आ गया, जिसमें दायरा और बढ़ गया। कई शिक्षकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का हवाला इसलिए दिया गया है ताकि आदेश का विरोध करने की गुंजाइश कम रहे।

DEO की टिप्पणी—“SC का आदेश, पालन करना ही होगा”

जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने स्पष्ट कहा कि यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर जारी किया गया है, इसलिए सभी स्कूलों को पालन अनिवार्य रूप से करना होगा। उन्होंने बताया कि सभी ब्लॉकों और स्कूलों तक पत्र भेज दिया गया है और आगे निरीक्षण भी किया जाएगा।

शिक्षक संगठनों का मानना है कि ज़िम्मेदारियों का यह असीमित विस्तार अंततः शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करेगा, क्योंकि शिक्षकों का समय पढ़ाई के बजाय गैर-शैक्षणिक कार्यों में अधिक खर्च हो रहा है। मुद्दा अब सिर्फ आदेश का नहीं, बल्कि “भूमिकाओं की मर्यादा” का बन चुका है—और इसी पर बहस आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकती है।

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