सीजी भास्कार 11 दिसम्बर Dalit House Meal Controversy : मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के एक छोटे से गांव में इंसानियत और जातीय भेदभाव को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पिपलिया पुआरिया ग्राम पंचायत के रहने वाले भरत राज धाकड़ को सिर्फ इसलिए समाज से बाहर कर दिया गया क्योंकि उन्होंने गांव के ही एक दलित परिवार के घर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भोजन कर लिया था। पूरा विवाद उस समय गंभीर हो गया जब किसी ने उनका वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया और मामला गांवभर में चर्चा का मुद्दा बन गया।
वीडियो वायरल होते ही पंचायत सक्रिय, परिवार पर बहिष्कार का फैसला
वीडियो सामने आने के बाद पंचायत के कुछ लोगों ने भरत राज पर कड़ा रुख अपनाते हुए बैठक बुलाई। बैठक में बिना किसी चर्चा या समझाइश के उनके पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। यहां तक कि गांव के वरिष्ठों ने हुक्का-पानी बंद करने से लेकर ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर गंगा जल पूजन और पूरे गांव के लिए भोज कराने का फरमान थमा दिया।
युवक आरएसएस से जुड़ा, फिर भी नहीं बदला समाज का रवैया
भरत राज धाकड़ लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं और संघ से जुड़े होने के कारण सामाजिक समरसता में विश्वास रखते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने केवल मानवता के नाते भोजन किया था, लेकिन समाज के कुछ लोग इस कदम से इतने नाराज़ हो गए कि उन्हें और उनके परिवार को अपराधी जैसा व्यवहार सहना पड़ रहा है। यह दावा भी किया जा रहा है कि गांव के कुछ वरिष्ठ लोग इस मामले को ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ा रहे हैं और पीड़ित परिवार को अपमानित कर रहे हैं।
कलेक्टर दरबार में गुहार, गिरफ्तारी भी हुई लेकिन समस्या जस की तस
भरत राज पहली बार नहीं, बल्कि दूसरी बार कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचे। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों की गिरफ्तारी जरूर हुई, लेकिन परिवार को सामाजिक रूप से अब भी कोई राहत नहीं मिली। उनके पिता को गांव में न तो कोई आमंत्रित करता है और न ही उनसे बातचीत करता है। भरत ने कहा कि “हमारा भोजन करना इतना बड़ा अपराध बता दिया गया, जैसे हमने कोई अक्षम्य गलती कर दी हो।”
गंगा स्नान और भंडारा भी कराया, फिर भी खत्म नहीं हुआ बहिष्कार
भरत राज ने पंचायत के निर्देश पर गंगा स्नान किया, भंडारा कराया और श्राद्ध कराकर प्रसाद भी बांटा, लेकिन इसके बावजूद गांव के सरपंच, उपसरपंच और कुछ बड़े बुजुर्ग उनके परिवार को सामान्य जीवन का हिस्सा नहीं बनने दे रहे हैं। भरत ने बताया कि इस सामाजिक अलगाव से उनके पिता मानसिक रूप से टूट रहे हैं और परिवार पर इसका असर लगातार बढ़ रहा है





