सीजी भास्कर, 12 दिसंबर | उत्तर प्रदेश में चल रहे (UP Operation Torch) के दौरान पुलिस ने राजधानी लखनऊ से शुरुआत करते हुए झुग्गी इलाकों में गहराई से पड़ताल शुरू की है।
कई जगहों पर जो बात सबसे ज़्यादा हैरान करने वाली सामने आई, वह यह कि लगभग हर संदिग्ध खुद को असम का नागरिक बताता है।
कुछ तो दस–पंद्रह साल से यहीं बसे हुए मिल रहे हैं और सरकारी नजूल जमीन पर झुग्गियां बनाकर रह रहे हैं।
सबके पास किसी न किसी तरह के दस्तावेज—आधार, राशन कार्ड या ID—मौजूद हैं, जिससे यह तय करना सबसे मुश्किल हो गया है कि कौन वैध है और कौन अवैध।
लव कुश नगर—500 परिवारों की बस्ती, पुलिस एक हफ्ते से पड़ताल में
लखनऊ के बटलर रोड और लव कुश नगर की झुग्गियां इस जांच का केंद्र बनी हुई हैं।
यहां करीब पाँच सौ से अधिक परिवार रहते हैं और ज्यादातर लोग ठेके पर काम करते हैं, मजदूरी करते हैं या कूड़ा बीनते हैं।
पुलिस ने एक–एक परिवार का डॉक्यूमेंट चेक किया है, और कार्रवाई के चलते कई लोग रातोंरात अन्य जगह कमरे तलाशने लगे हैं।
इसी दौरान बार-बार यही बात दोहराई जा रही है कि वे असम से आए हैं, और इस हैसियत से खुद को भारतीय बताते हैं—जो जांच को और पेचीदा बना देता है।
मुजफ्फरनगर में किरायेदारों और प्रवासियों की घर–घर जांच
मुजफ्फरनगर में यह अभियान पिछले एक महीने से निरंतर चल रहा है।
टीमें मोहल्लों और सड़कों के किनारे बनी झुग्गियों में पहुंचकर किरायेदारों, अस्थायी मजदूरों और घूम-घूमकर काम करने वालों का सत्यापन कर रही हैं।
उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति अवैध तरीके से जिले में रहकर किसी गलत गतिविधि में शामिल न हो।
अब तक की जांच में संदिग्ध सामान नहीं मिला, लेकिन पुलिस की प्राथमिकता उन लोगों पर है जो बिना वैध कागजों के यहां लंबे समय से बसे हुए हैं—इन्हें अभियान का हिस्सा मानकर चेक किया जा रहा है।
‘Operation Torch’ के दायरे में रोज़ी–रोटी कमाने वाले भी आए
मुजफ्फरनगर में मिले लोगों में अधिकतर प्रवासी हैं।
कोई दिल्ली से आया है, कोई राजस्थान से, और कोई छोटे व्यापार या फेरी लगाने का काम करता है।
कई लोग ई-रिक्शा चलाते हैं, जिससे उनके ID कार्ड और निवास स्थलों की वास्तविकता की जांच और महत्वपूर्ण हो गई है।
टीम का कहना है कि कोई भी गलत इरादा रखने वाला या अवैध रूप से जिले में रहने वाला पाया गया, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
संभल में छापेमारी—6 बांग्लादेशी पकड़े गए, महिलाएं भी शामिल
संभल जिले में चल रही कार्रवाई में बड़ा खुलासा हुआ है।
यहां झुग्गियों में चल रही रात की चेकिंग के दौरान छह लोग पकड़े गए—जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं।
इन सभी के पास भारत की नागरिकता संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिला।
जिला स्तरीय कमेटी के सामने इन्हें पेश किया गया है, जबकि पुलिस अब इनके नेटवर्क और यहां आने के रास्तों की जांच कर रही है।
मऊ में रात की कार्रवाई—झुग्गियों में अफरा-तफरी, कई लोग मौके से भागे
मऊ जिले में (UP Operation Torch) का सबसे तेज़ रूप देखने को मिला।
टीमें रात के समय सड़क किनारे बनी अस्थायी झोपड़ियों में पहुंचीं और वहां रह रहे बाहरी लोगों से पूछताछ की।
जैसे ही अभियान शुरू हुआ, कई लोग मौके से गायब हो गए—उनके परिवार वालों को सत्यापन के लिए थाने पहुंचने का आदेश दिया गया है।
जांच अधिकारी मानते हैं कि ऐसे लोगों का अचानक फरार होना कई सवाल खड़े करता है।
‘UP Operation Torch’ का आगे का चरण—नेटवर्क की गहराई तक जाने की तैयारी
अभियान का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
टीमें दस्तावेजों की डिजिटल जांच, मोबाइल डेटा एनालिसिस और ठिकानों की पुष्टि कर रही हैं।
यह कहा जा रहा है कि यह सिर्फ सत्यापन नहीं, बल्कि अवैध रूप से बसे नेटवर्क की पहचान का भी प्रयास है।
जैसे-जैसे जिलों से रिपोर्टें एकत्र हो रही हैं, वैसे-वैसे आगे की कार्रवाई की रूपरेखा और स्पष्ट होती जा रही है।






