सीजी भास्कर, 15 दिसंबर। जंगल में बाघ का शव (Surajpur Tiger Death) मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। बाघ की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, जंगली सूअर के शिकार के लिए बिछाए गए बिजली से करंट तार के संपर्क में आने से बाघ की मौत हुई हो सकती है। इससे पहले इसी इलाके में करंट से हाथियों की मौत हो चुकी है। हालांकि, यह पहली बार है जब बाघ का शव मिला है। शव से नाखून और दांत गायब होने की भी खबर है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शव को तीन से चार दिन पुराना बताया जा रहा है।
सूरजपुर जिले के भैसामुंडा से लगे जंगल में घटना की सूचना मिलते ही फॉरेंसिक टीम, पशु चिकित्सकों की टीम और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। शव का परीक्षण किया जा रहा है और पूरे घटनाक्रम की गहन जांच जारी है। यह क्षेत्र दूरस्थ और घने जंगलों वाला होने के कारण अधिकारियों के लिए संपर्क बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण है।
स्थानीय स्तर पर यह भी बताया जा रहा है कि मृत बाघ (Surajpur Tiger Death) के नाखून और दांत निकाले गए हो सकते हैं। वन विभाग ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अधिकारी घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों की बारीकी से जांच कर रहे हैं और हर पहलू की छानबीन कर रहे हैं। यह वही बाघ हो सकता है, जिसे दो-तीन वर्ष पहले वाड्रफनगर और प्रतापपुर क्षेत्र में देखा गया था। उस समय बाघ के पंजों के निशान भी मिले थे और ट्रैप कैमरे में उसकी तस्वीर भी कैद हुई थी। सूरजपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों से बाघों का लगातार विचरण देखा जा रहा है।
विशेष रूप से सूरजपुर और कोरिया जिले की सीमावर्ती टेमरी क्षेत्र व आसपास के जंगलों में बाघों की गतिविधियां नियमित रूप से देखी जाती रही हैं। यह क्षेत्र हाथियों के विचरण वाला भी है। पहले करंट से हाथियों की मौतें होती रही हैं, लेकिन पहली बार किसी बाघ की मौत की यह घटना अधिकारियों को भी सकते में डाल रही है।
दो साल से घूम रहा बाघ
सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ रेंज में लगभग दो साल पहले बाघ (Surajpur Tiger Death) द्वारा दो ग्रामीणों पर हमला किया गया था, जिसमें दोनों की मौत हो गई थी। उस घटना में ग्रामीणों द्वारा टांगी से किए गए वार के बाद घायल बाघ का रेस्क्यू और उपचार कराया गया था। लगातार हो रही घटनाओं के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और बाघ संरक्षण पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध करंट तारों का उपयोग, मानव-वन्यजीव संघर्ष और निगरानी व्यवस्था की कमज़ोरी पर अधिकारी अक्सर मौन रहे हैं। फिलहाल, वन विभाग की टीम जांच में जुटी हुई है और पोस्टमार्टम व फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही बाघ की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा संभव होगा।


