सीजी भास्कर, 17 दिसंबर। प्राचार्य पद पर पदोन्नति और काउंसलिंग के बाद जारी पदस्थापना आदेशों के बावजूद कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले अधिकारियों पर अब सख्ती की तैयारी (Chhattisgarh Principal Posting) शुरू हो गई है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के सभी संयुक्त संचालकों (JD) को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि ऐसे प्राचार्यों की कैडरवार विस्तृत रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए।

DPI को यह जानकारी मिली है कि पदस्थापना आदेश जारी होने के बाद भी कई प्राचार्य अपने-अपने स्कूलों में ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। इसे शैक्षणिक व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति मानते हुए अब विभाग स्तर पर निगरानी तेज कर दी गई है।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मिला था पदोन्नति का रास्ता
लंबे समय तक चली अदालती लड़ाई के बाद ई संवर्ग के 1478 व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर पदोन्नति का अवसर मिला था। वहीं हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश के बाद टी संवर्ग के व्याख्याताओं को भी प्राचार्य पद (Chhattisgarh Principal Posting) पर पदोन्नति दी गई। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया में देरी के चलते दोनों संवर्ग के 800 से अधिक व्याख्याता पदोन्नति से पहले ही सेवानिवृत्त हो गए थे।
सिंगल बेंच के फैसले के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने ई संवर्ग के व्याख्याताओं के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी कर पदस्थापना आदेश जारी किए थे। इसके बाद टी संवर्ग और ई संवर्ग, दोनों के प्राचार्यों को अलग-अलग तिथियों में स्कूल आवंटित किए गए।
तय समय-सीमा के बाद भी ज्वाइनिंग नहीं
DPI के अनुसार, टी संवर्ग के पदोन्नत प्राचार्यों के लिए 29 अगस्त 2025 को पदस्थापना आदेश जारी किए गए थे और उन्हें 10 दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य था। ई संवर्ग के प्राचार्यों के लिए 27 नवंबर 2025 को आदेश जारी हुए थे, जिनके लिए एक सप्ताह की समय-सीमा तय की गई थी। इसके बावजूद कई मामलों में तय अवधि बीत जाने के बाद भी ज्वाइनिंग नहीं की गई है।
जवाबदेही तय करने की तैयारी
DPI ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि जेडी को यह जानकारी निर्धारित प्रारूप में भेजनी होगी कि कितने प्राचार्यों ने कार्यभार ग्रहण (Chhattisgarh Principal Posting) कर लिया है, कितनों ने नहीं किया है और ज्वाइनिंग न करने के पीछे क्या कारण हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट के आधार पर आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई या अन्य प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकते हैं।
इस कार्रवाई से साफ संकेत है कि स्कूल शिक्षा विभाग अब पदोन्नति के बाद लापरवाही या विलंब को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और प्राचार्य पद जैसे जिम्मेदार पदों पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।


