Interstate Tiger Relocation : देश का पहला पूर्ण अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण अभियान आखिरकार अपने अंतिम चरण तक पहुंच गया। मध्य भारत के पेंच टाइगर रिजर्व से बाघिन पीएन-224 को सुरक्षित तरीके से राजस्थान के टाइगर रिजर्व के लिए रवाना किया गया।
सुबह से दोपहर तक जंगल के भीतर हाथियों की मदद से कई स्तरों पर घेराबंदी की गई। घने वन क्षेत्र में बाघिन की गतिविधियों को देखते हुए टीम को बार-बार रणनीति बदलनी पड़ी, जिसके बाद ट्रेंकुलाइजेशन की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
सुकतरा से उड़ान, शाम को हुआ ट्रांसफर
बेहोश करने के बाद बाघिन को पिंजरे में सुरक्षित कर रेस्क्यू वाहन से सुकतरा हवाई पट्टी लाया गया। यहां भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर से शाम करीब छह बजे उसे राजस्थान के लिए एयरलिफ्ट किया गया।
नवंबर से चला सघन अभियान
इस बाघिन को स्थानांतरित करने का अभियान 28 नवंबर से लगातार जारी था। बीते चार दिनों में ऑपरेशन को और तेज किया गया, लेकिन बाघिन बार-बार अपनी चालाकी से टीम को चकमा देकर निकल जाती थी।
कैमरे, पगमार्क और लगातार निगरानी
सर्च ऑपरेशन में आठ हाथी दल के साथ 50 से अधिक वनकर्मी मैदानी स्तर पर तैनात रहे। बाघिन की सटीक लोकेशन के लिए ट्रैप कैमरे, ऑनलाइन कैमरे और पगमार्क के आधार पर उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी।
डाट लगाकर मिली सफलता
लगातार प्रयासों के बाद रविवार को डाट लगाकर बाघिन को सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज किया गया। इसके बाद तय प्रोटोकॉल के अनुसार उसे पिंजरे में शिफ्ट कर ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की गई।
आनुवांशिक विविधता को मिलेगा बल
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का अंतरराज्यीय स्थानांतरण बाघों की आनुवांशिक विविधता बढ़ाने और अलग-अलग टाइगर रिजर्व में आबादी को संतुलित करने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे दीर्घकालीन संरक्षण रणनीति को मजबूती मिलती है।





