सीजी भास्कर, 06 मई : पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee Oath Controversy) के मुख्यमंत्री पद की शपथ और राजनीतिक गतिरोध को लेकर चल रहे देशव्यापी विवाद के बीच छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता और पूर्व उप-मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव (टीएस बाबा) का एक बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। टीएस सिंहदेव ने संवैधानिक मर्यादाओं और नियमों का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल के इस पूरे राजनीतिक ड्रामे पर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश के संविधान में मुख्यमंत्री की नियुक्ति और शपथ ग्रहण को लेकर किसी भी प्रकार का कोई संशय या भ्रम नहीं है, सब कुछ कानून की किताबों में पहले से ही बेहद स्पष्ट रूप से दर्ज है। इस राजनीतिक बहस ने देश में (Constitutional Law) संवैधानिक कानून की व्याख्या को लेकर एक नई चर्चा छेड़ दी है।
राज्यपाल अपनी मर्जी से फैसला नहीं ले सकते
पश्चिम बंगाल (Mamata Banerjee Oath Controversy) में उपजे इस गंभीर राजनीतिक संकट और ममता बनर्जी के इस्तीफे की खबरों पर चर्चा करते हुए पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने भारतीय संविधान के बेहद महत्वपूर्ण अनुच्छेद 163 और अनुच्छेद 164 का खुलकर हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के नियमों के तहत राज्यपाल राज्य में पूर्ण बहुमत हासिल करने वाले राजनीतिक दल या गठबंधन के नेता को सरकार बनाने और शपथ ग्रहण के लिए आमंत्रित करने के लिए पूरी तरह से बाध्य हैं। टीएस बाबा ने जोर देकर कहा कि राज्यपाल की ‘इच्छा’ या उनका विवेकाधिकार पूरी तरह से संवैधानिक नियमों और मर्यादाओं से बंधा होता है। राज्यपाल का कोई भी फैसला मनमाना या व्यक्तिगत पसंद-नापसंद पर आधारित नहीं हो सकता। विधायक दल लोकतांत्रिक तरीके से जिसे भी अपना सर्वमान्य नेता चुनता है, राज्यपाल को अनिवार्य रूप से उसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त करना होता है। इसमें किसी भी तरह के (Constitutional Law) (संवैधानिक कानून) का उल्लंघन देश के संघीय ढांचे के खिलाफ होगा।
‘ममता बनर्जी का रुख समझ से परे’
इस पूरे विवाद में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee Oath Controversy) के वर्तमान राजनीतिक रुख और बयानों पर टीएस सिंहदेव ने भी थोड़ा अचरज जताया है। उन्होंने कहा कि जब संविधान के नियम और प्रक्रियाएं इतनी स्पष्ट और पारदर्शी हैं, तो फिर इस स्तर पर विवाद खड़ा करने या असमंजस की स्थिति बनाने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी। वे खुद यह समझ नहीं पा रहे हैं कि इतने स्पष्ट प्रावधानों के बाद भी पश्चिम बंगाल में इस तरह की असहज और विवादास्पद स्थिति क्यों निर्मित की जा रही है।
कब लगता है राष्ट्रपति शासन
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए टीएस सिंहदेव ने संवैधानिक तंत्र के विफल होने की स्थिति पर भी खुलकर बात की। उन्होंने देश के (Constitutional Law) (संवैधानिक कानून) के तहत बताया कि केवल और केवल उसी असाधारण परिस्थिति में कार्यकारी मुख्यमंत्री की नियुक्ति या राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने जैसे कठोर विकल्पों पर विचार किया जाता है, जब राज्य की विधानसभा में कोई भी दल बहुमत साबित करने की स्थिति में न हो या फिर पूरी संवैधानिक व्यवस्था ही पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हो।


