सीजी भास्कर, 06 मई : छत्तीसगढ़ में पारा चढ़ने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और निस्तारी (रोजमर्रा के कार्यों के लिए पानी) का संकट गहराने लगा है। इस तपती गर्मी में ग्रामीणों को राहत देने के लिए बलौदाबाजार-भाटापारा जिला प्रशासन ने एक बेहद सराहनीय और बड़ी पहल की है। जिला प्रशासन द्वारा महानदी जलाशय परियोजना (Mahanadi Reservoir Project) की नहरों के माध्यम से जिले के सूखे तालाबों को गंगाजल से सराबोर किया जा रहा है। अब तक जिले के 570 तालाबों को पानी से पूरी तरह भर दिया गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत दूर होने लगी है। इस भगीरथ प्रयास से क्षेत्र में (Groundwater Recharge) (भूजल पुनर्भरण) को भी एक नया जीवन मिल रहा है।
384 गांवों के 683 तालाबों को भरने का है महा-लक्ष्य : Mahanadi Reservoir Project
जल संसाधन विभाग (Water Resources Department) से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भीषण गर्मी के इस मौसम में ग्रामीणों और मवेशियों को पानी के संकट से बचाने के लिए एक वृहद कार्ययोजना तैयार की गई है। जिले के कुल 384 गांवों के 683 तालाबों को नहर प्रणाली के जरिए लबालब भरने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिला प्रशासन की मुस्तैदी से अब तक 570 तालाब पूरी तरह भरे जा चुके हैं, जबकि 60 तालाबों में पानी भरने का कार्य तीव्र गति (प्रगतिरत) पर है। शेष बचे तालाबों को भी अगले कुछ ही दिनों में पानी से भर दिया जाएगा, जिससे पूरे जिले में ग्रीष्म ऋतु के दौरान निस्तारी का संकट पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
ग्रामीणों को निस्तारी से मुक्ति और वाटर रिचार्जिंग को बढ़ावा
इन तालाबों के भरने से केवल रोजमर्रा की जरूरतें ही पूरी नहीं हो रही हैं, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा फायदा पहुंच रहा है। ग्रामीणों को नहाने, कपड़े धोने और अपने मवेशियों को पानी पिलाने के लिए अब मीलों दूर भटकना नहीं पड़ रहा है। तालाबों में लगातार पानी रहने के कारण आस-पास के क्षेत्रों में (Groundwater Recharge) (भूजल पुनर्भरण) तेजी से हो रहा है। इससे क्षेत्र के हैंडपंप, कुएं और नलकूपों का जलस्तर (Water Level) भी सुधर रहा है।
Mahanadi Reservoir Project : पानी की एक-एक बूंद की हो कड़ी मॉनिटरिंग
कलेक्टर कुलदीप शर्मा इस पूरी मुहिम की खुद कमान संभाले हुए हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग के मैदानी अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया है कि बचे हुए सभी तालाबों में बिना किसी देरी के तत्काल पानी भरना सुनिश्चित किया जाए। नहरों के जरिए छोड़े जा रहे पानी की कड़ी मॉनिटरिंग की जाए ताकि पानी व्यर्थ बहकर बर्बाद न हो। जल संसाधन विभाग के अमले को फील्ड पर रहकर लगातार पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि टेल एरिया (नहर के अंतिम छोर) तक पानी सुचारू रूप से पहुंच सके।


