सीजी भास्कर, 06 मई : छत्तीसगढ़ सरकार ने रायपुर जिले के तिल्दा विकासखंड के किसानों (Bhatapara Canal Tilda) को एक बड़ी सौगात दी है। क्षेत्र की कृषि व्यवस्था और सिंचाई क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा भाटापारा नहर प्रणाली के जीर्णोद्धार और उन्नयन कार्यों के लिए 3 करोड़ 64 लाख 44 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस बजट के जारी होने से नहरों के अंतिम छोर (टेल एरिया) तक पानी का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित हो सकेगा, जिससे क्षेत्र में (Water Resource) जल संसाधन का सही और कुशल उपयोग संभव होगा।
इन महत्वपूर्ण कार्यों से सुधरेगी नहरों की सेहत
इस स्वीकृत बजट (Bhatapara Canal Tilda) के जरिए भाटापारा नहर प्रणाली के अंतर्गत निम्नलिखित महत्वपूर्ण तकनीकी और बुनियादी सुधार कार्य किए जाएंगे। पानी के बहाव को नियंत्रित और जरूरत के अनुसार मोड़ने के लिए नए रेगुलेटरों का निर्माण किया जाएगा। अतिरिक्त पानी की सुरक्षित निकासी के लिए स्केप गेट और आधुनिक हाईस्ट अरेंजमेंट (द्वार उठाने की प्रणाली) का जीर्णोद्धार और उन्नयन होगा। सभी पुराने गेटों की डेंटिंग-पेंटिंग की जाएगी और पानी के रिसाव (लीकेज) को रोकने के लिए नई रबर सील लगाई जाएगी। इन तकनीकी सुधारों के बाद नहरों से होने वाली पानी की बर्बादी रुकेगी और खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचेगा, जिससे तिल्दा क्षेत्र के (Water Resource) जल संसाधन प्रबंधन में बड़ा सुधार आएगा।
महानदी परियोजना (रायपुर) के मुख्य अभियंता को कमान
शासन ने इस पूरी परियोजना (Bhatapara Canal Tilda) को समय सीमा के भीतर और तय मानकों के अनुरूप पूरा करने की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता, महानदी परियोजना, जल संसाधन विभाग (रायपुर) को सौंपी है। प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद अब विभाग जल्द ही इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। अधिकारियों का प्रयास रहेगा कि मानसून सीजन और रबी सीजन की सिंचाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन मरम्मत कार्यों को तेजी से निपटाया जाए।
संजीवनी साबित होगी यह योजना
तिल्दा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांवों की खेती मुख्य रूप से नहर प्रणाली पर निर्भर करती है। लंबे समय से रखरखाव के अभाव में नहरों के गेट और रेगुलेटर जर्जर हो चुके थे, जिससे पानी का रिसाव होता था और अंतिम छोर पर स्थित खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता था। इस 3.64 करोड़ रुपये के विकास कार्यों से सिंचाई की समस्याएं दूर होंगी और फसलों की पैदावार बढ़ाने में मदद मिलेगी।


