सीजी भास्कर, 06 मई : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की जीवनदायिनी और प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में से एक गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) के सौंदर्यकरण और सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा बांध परिसर के विकास कार्यों के लिए 4 करोड़ 45 लाख 72 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस बड़ी राशि के आवंटन से न केवल इस महत्वपूर्ण बांध की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि यहाँ आने वाले पर्यटकों को भी एक नया और बेहतर अनुभव मिलेगा, जिससे क्षेत्र में (Water Resource) जल संसाधन पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा।
निरीक्षण गृह और गार्डन बाउंड्रीवाल का होगा जीर्णोद्धार
शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस स्वीकृत राशि का उपयोग मुख्य रूप से दो प्रमुख कार्यों के लिए किया जाएगा। निरीक्षण गृह परिसर का विकास: गंगरेल बांध स्थित शासकीय निरीक्षण गृह (रेस्ट हाउस) परिसर का कायाकल्प किया जाएगा ताकि यहां आने वाले अतिथियों और अधिकारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहने वाले बांध के दांयी ओर स्थित खूबसूरत गार्डन की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए एक मजबूत बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जाएगा। यह दोनों ही कार्य बांध की सुरक्षा व्यवस्था और सौंदर्य को बढ़ाने के लिए लंबे समय से प्रस्तावित थे, जिन्हें अब इस (Water Resource) जल संसाधन बजट के जरिए हरी झंडी मिल गई है।
जल्द शुरू होगा काम
योजना के सभी कार्यों को गुणवत्ता के साथ और समय सीमा के भीतर पूरा कराने के लिए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, महानदी परियोजना (रायपुर) को प्रशासकीय स्वीकृति सौंपते हुए जिम्मेदारी दी गई है। विभाग की तकनीकी टीम जल्द ही निर्माण कार्य का एस्टीमेट तैयार कर टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगी। अधिकारियों का कहना है कि काम शुरू होने के बाद इसे रिकॉर्ड समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि मानसून सीजन और उसके बाद आने वाले सैलानियों को इस बदले हुए स्वरूप का लाभ मिल सके।
धमतरी और प्रदेश के लिए क्यों खास है गंगरेल बांध
महानदी पर बना रविशंकर सागर बांध (गंगरेल) छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण जलाशय है। यह बांध न केवल धमतरी, रायपुर और दुर्ग जिले के लाखों किसानों की फसलों के लिए सिंचाई का मुख्य जरिया है, बल्कि रायपुर संभाग के उद्योगों और पेयजल आपूर्ति के लिए भी (Water Resource) (जल संसाधन) का सबसे बड़ा स्रोत है। इसके साथ ही, इसके नैसर्गिक सौंदर्य और वॉटर स्पोर्ट्स की वजह से इसे छत्तीसगढ़ का ‘मिनी गोवा’ भी कहा जाता है। इस नए जीर्णोद्धार कार्य से यहाँ पर्यटन गतिविधियों को और अधिक पंख लगेंगे।


