सीजी भास्कर, 06 मई : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक राजकुमार कॉलेज (Chhattisgarh Historical Discovery) से इतिहास और साहित्य प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक और बड़ी खबर सामने आई है। कॉलेज परिसर के भीतर ऐतिहासिक दस्तावेजों के सर्वे के दौरान वर्ष 1931 से 1947 के कालखंड की 25 अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियां और ऐतिहासिक पत्र प्राप्त हुए हैं। इन दस्तावेजों में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, बाबू जगजीवन राम और प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जैसी महान विभूतियों के मूल हस्ताक्षर मौजूद हैं। इस ऐतिहासिक खोज के बाद अब कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के नेतृत्व में इन हस्तलिखित धरोहरों के (Digital Preservation) (डिजिटल संरक्षण) की एक विशेष और बड़ी मुहिम शुरू कर दी गई है।
धरोहरों को सहेजने वाले शिक्षक और अधिकारी सम्मानित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश (Chhattisgarh Historical Discovery) की विरासत को सहेजने की परिकल्पना और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रायपुर जिला प्रशासन इन दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण में जुट गया है। इस खोज और संरक्षण कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने राजकुमार कॉलेज के कस्टोडियन प्राचार्य अरविंद सिंह, उप प्राचार्य शिवेंद्र एस.एन. देव, सर्वेयर श्रीमती अनुरिमा शर्मा और श्रीमती प्रेरणा मिश्रा को कलेक्ट्रेट में विशेष रूप से सम्मानित किया। इस पहल के तहत इन सभी ऐतिहासिक कड़ियों का बारीकी से दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।
ब्रिटिश कालीन ‘NAGPOOR’ का मिला प्रमाण
राजकुमार कॉलेज (Chhattisgarh Historical Discovery) के भ्रमण और सर्वे के दौरान जो 25 हस्तलिखित एवं चित्रकला पांडुलिपियां मिली हैं, वे भारत की आजादी के ठीक पहले (1931-1947) के दौर की हैं। आखिरी अंग्रेज प्राचार्य का लेख: इस खोज में कॉलेज के अंतिम ब्रिटिश प्रिंसिपल ‘स्मिथ’ का एक दुर्लभ लेख भी मिला है, जो उस दौर के राजकुमारों की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था पर बेहद अनूठा प्रकाश डालता है। कुछ दस्तावेजों में नागपुर शहर के लिए ब्रिटिश कालीन अंग्रेजी उच्चारण “NAGPOOR” शब्द लिखा हुआ मिला है, जो उस दौर की प्रशासनिक लिखावट को दर्शाता है। सर्वे के दौरान नेहरू जी और बाबू जगजीवन राम के अलावा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी, कैलाश नाथ काटजू और ओडिशा की पूर्व महिला मुख्यमंत्री नंदिनी सतपथी के मूल हस्ताक्षरयुक्त शासकीय पत्र भी मिले हैं, जो 75 साल से भी ज्यादा पुराने हैं।
हस्तलिखित संदेश बना आकर्षण का केंद्र
इस पूरे ऐतिहासिक खजाने में सबसे खूबसूरत खोज हिंदी साहित्य के महान हस्ताक्षर डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ से जुड़ी है। राजकुमार कॉलेज की ऐतिहासिक ‘विजिटर बुक’ (आगंतुक पुस्तिका) में डॉ. सुमन द्वारा अपने खुद के हाथों से लिखा गया एक बेहद खूबसूरत शुभकामना संदेश मिला है। इस संदेश को देखना और पढ़ना अपने आप में इतिहास को जीवंत होते देखने जैसा है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि इन अमूल्य और ऐतिहासिक पांडुलिपियों का आधुनिक स्कैनर्स के जरिए (Digital Preservation) (डिजिटल संरक्षण) किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियां और इतिहास के शोधकर्ता छत्तीसगढ़ की इस गौरवशाली और समृद्ध शैक्षणिक विरासत से रूबरू हो सकें।


