सीजी भास्कर, 06 मई : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पिथौरा वन परिक्षेत्र से वन्य जीवों के शिकार (Nilgai Poaching Pithora) की एक बेहद क्रूर और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। सुखीपाली के शांतिनगर जंगल में एक मादा नीलगाय की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। तस्करों ने न सिर्फ नीलगाय का शिकार किया, बल्कि उसके पैर काटकर भी अलग कर दिए। मुखबिर की सूचना पर हरकत में आए वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है, जिनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में वन्यजीव प्रेमियों और (Wildlife Protection) वन्यजीव संरक्षण विभाग में भारी आक्रोश है।
गले पर धारदार हथियार से वार
यह पूरी वारदात पिथौरा वन परिक्षेत्र के सुखीपाली (शांतिनगर) कक्ष क्रमांक 234 के पास अंजाम दी गई। वनमंडलाधिकारी (DFO) मयंक पाण्डेय के निर्देश पर जब 4 मई की सुबह वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था। तस्करों ने नीलगाय (Nilgai Poaching Pithora) को बेमौत मारने के बाद उसके दो पैर काटकर शरीर से पूरी तरह अलग कर दिए थे। नीलगाय के गले पर किसी बेहद धारदार हथियार से वार किए जाने के गहरे निशान मिले हैं। पशु चिकित्सकों की शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी धारदार हथियार के हमले से अत्यधिक खून बहने के कारण ही मौत होने की पुष्टि हुई है।
डॉग स्क्वाड और फोरेंसिक टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग ने जांच के लिए वैज्ञानिक और आधुनिक तरीके अपनाए हैं। रायपुर स्थित जंगल सफारी की विशेष डॉग स्क्वाड (श्वान दल) और सांकरा के सरकारी पशु चिकित्सकों की टीम को तुरंत मौके पर बुलाया गया। खोजी कुत्तों की मदद से घटनास्थल के आसपास के जंगलों और तस्करों के संभावित ठिकानों पर सुराग खोजे गए। इस त्वरित वैज्ञानिक जांच के आधार पर वन विभाग को शिकारियों का सुराग ढूंढने में बड़ी सफलता हाथ लगी है, जो कि (Wildlife Protection) वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम है।
दो शिकारी शिकंजे में
वन विभाग ने तफ्तीश के आधार पर ग्राम शांतिनगर निवासी दो मुख्य संदिग्धों को दबोच लिया है। जोहित दास (पिता दुर्लभ दास, उम्र 30 वर्ष) और सुरेन्द्र (पिता उदयराम, उम्र 32 वर्ष) दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। शुरुआती पूछताछ में घटना में 6 अन्य स्थानीय शिकारियों की संलिप्तता का भी पर्दाफाश हुआ है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए वन विभाग की विशेष टीमें जंगलों और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 51, 52 सहित अन्य गंभीर गैर-जमानती धाराओं के तहत पी.ओ.आर. (प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट) दर्ज कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा शव (Nilgai Poaching Pithora) का विस्तृत पोस्टमार्टम किए जाने के बाद, पूरी मर्यादा और नियमानुसार मृत नीलगाय के शव का अंतिम संस्कार (दाह संस्कार) कर दिया गया। इस दौरान मौके पर संयुक्त वनमंडलाधिकारी पिथौरा सुश्री डिम्पी बैस, परिक्षेत्र अधिकारी सुखराम निराला सहित स्थानीय ग्राम पंचायतों के सरपंच, जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


