छत्तीसगढ़ में इस बार (Paddy Procurement Festival 2025) ने केवल धान की खरीदी नहीं की, बल्कि किसानों के भरोसे को भी मजबूत किया है। बेहतर कीमत, साफ व्यवस्था और समय पर भुगतान—इन तीन आधारों पर खड़ी यह पहल किसानों के लिए राहत बनकर सामने आई है। गांव-गांव से यही आवाज़ सुनाई दे रही है कि मेहनत का मोल अब समय पर और सम्मान के साथ मिल रहा है।
प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, किसान-सम्मान का पर्व
धान खरीदी को इस वर्ष एक साधारण सरकारी कामकाज से आगे ले जाकर किसान-सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। उद्देश्य साफ है—उपज का उचित दाम, बाजार की अनिश्चितता से सुरक्षा और खाद्य तंत्र को स्थिरता। इसी सोच के साथ समर्थन मूल्य पर खरीदी 31 जनवरी 2026 तक जारी रखी गई है और भुगतान की समयसीमा तय कर 72 घंटे के भीतर सीधे खाते में राशि पहुंचाने की व्यवस्था लागू की गई है।
केंद्रों का विस्तार, भागीदारी का भरोसा
राज्यभर में 2,739 खरीदी केंद्रों के जरिए व्यवस्था को गांव के नज़दीक पहुंचाया गया है। 27 लाख से अधिक पंजीकृत किसान इस अभियान का हिस्सा बने हैं, जिनमें बड़ी संख्या नए पंजीकरणों की भी है। 34 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की खेती ने यह संकेत दिया है कि (Paddy Procurement Festival 2025) ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी बन रहा है।
मूल्य निर्धारण—लागत के दबाव में राहत
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी 15 नवंबर 2025 से शुरू हुई। किसानों को ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है, जिसमें केंद्र का समर्थन मूल्य और राज्य की अतिरिक्त सहायता शामिल है। बढ़ती लागत के दौर में यह दर किसानों के लिए संबल साबित हो रही है।
डिजिटल टोकन से व्यवस्था में अनुशासन
खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए ‘तुहर टोकन’ जैसी डिजिटल प्रणाली लागू की गई। तय तारीख-समय पर केंद्र पहुंचने से भीड़ और इंतज़ार कम हुआ। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 तक 87 लाख टन से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है और ₹7,700 करोड़ से ज्यादा की राशि किसानों के खातों में पहुंचाई जा चुकी है—यह (Paddy Procurement Festival 2025) की कार्यकुशलता को दर्शाता है।
निगरानी सख्त, पारदर्शिता बरकरार
बाहरी राज्यों से अवैध आवक और गैरकानूनी परिवहन रोकने के लिए सीमावर्ती इलाकों में चेक-पोस्ट और निगरानी बढ़ाई गई है। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई कर धान जब्त किया जा रहा है, ताकि व्यवस्था की निष्पक्षता बनी रहे।
चुनौतियां भी आईं, समाधान भी निकले
कुछ क्षेत्रों में उठाव और परिवहन से जुड़ी दिक्कतें सामने आईं, जहां बफर सीमा भरने की स्थिति बनी। इसे देखते हुए खाद्य विभाग ने बफर लिमिट बढ़ाने जैसे व्यावहारिक फैसले लिए, ताकि खरीदी बाधित न हो और किसानों को लौटना न पड़े।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
कुल मिलाकर, (Paddy Procurement Festival 2025) ने मूल्य, तकनीक और समयबद्ध भुगतान के जरिए किसानों का भरोसा मजबूत किया है। यह भरोसा आने वाले वर्षों में राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता और गति—दोनों देने वाला साबित होगा।


