सीजी भास्कर, 25 दिसंबर | Police Station Love Marriage CG–MP: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में एक प्रेम कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने कानून, समाज और संवेदना—तीनों को एक मंच पर ला खड़ा किया। मध्यप्रदेश की एक युवती और छत्तीसगढ़ के युवक की मोहब्बत जब परिवार की दीवारों से टकराई, तो दोनों ने भागने की नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान की राह चुनी। नतीजा यह हुआ कि थाना परिसर ही विवाह मंडप बन गया और पुलिसकर्मी रिश्तों के साक्षी।
दो राज्यों की दूरी, एक भरोसे की डोर
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले की रहने वाली मीरा सिंह और मरवाही क्षेत्र के धूम्माटोला बहरीझोरकी निवासी संजय सिंह लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे। समय के साथ यह रिश्ता प्रेम में बदला, लेकिन परिवार की सहमति न मिलने से दोनों मानसिक दबाव में आ गए। हालात बिगड़ने से पहले उन्होंने मरवाही थाने का रुख किया और अपनी सुरक्षा की मांग रखी।
पहले कानून, फिर कन्यादान
थाना प्रभारी शनिप रात्रे ने मामले को भावनाओं से नहीं, कानून की कसौटी पर परखा। युवक-युवती की उम्र, आपसी सहमति और स्वेच्छा से विवाह की पुष्टि की गई। इसके बाद दोनों पक्षों के परिजनों को बुलाकर स्पष्ट रूप से उनके कानूनी अधिकार समझाए गए। बातचीत लंबी रही, लेकिन समझाइश का असर दिखा और विरोध की जगह सहमति ने ले ली।
शिव मंदिर में बंधा जीवनभर का रिश्ता
थाना परिसर स्थित शिव मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह संपन्न कराया गया। न ढोल-नगाड़े थे, न शोर—लेकिन माहौल में अपनापन और सुकून साफ झलक रहा था। पुलिसकर्मी बाराती बने, किसी ने फूल सजाए तो किसी ने व्यवस्थाएं संभाली। यह दृश्य बताता है कि कानून केवल दंड नहीं, सहारा भी हो सकता है।
कानून के साथ सामाजिक संतुलन भी जरूरी
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल ने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल विवाद सुलझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में संतुलन और सुरक्षा बनाए रखना भी उसका दायित्व है। यह विवाह उसी सोच का परिणाम है, जहां कानून और इंसानियत साथ-साथ चलते हैं।
भरोसे की जीत
यह घटना सिर्फ एक शादी की कहानी नहीं, बल्कि उस भरोसे की मिसाल है जिसमें युवा भागने की बजाय व्यवस्था पर विश्वास करते हैं। थाना परिसर में सजी यह शादी आने वाले समय में उन लोगों के लिए उदाहरण बन सकती है, जो प्रेम और सुरक्षा के बीच फंसे होते हैं।





