सीजी भास्कर, 26 दिसंबर। आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से पौध उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। निगम द्वारा हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के माध्यम से मिट्टी रहित खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे जल और भूमि की बचत के साथ-साथ महिला स्व-सहायता समूहों और किसानों की आजीविका को सशक्त बनाया जा सके।
इसी उद्देश्य से 18 से 20 दिसंबर 2025 तक हाइड्रोपोनिक्स तकनीक पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जो आधुनिक नर्सरी विकास (Hydroponics Nursery Development) की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीकों से पौध उत्पादन की जानकारी देना तथा नर्सरी विकास की संभावनाओं को विस्तार देना रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कोकोपीट, वर्मीकम्पोस्ट और सोलराइट जैसे माध्यमों को सही अनुपात में मिलाकर ट्रे में पौधा रोपण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इसमें नरम तने और कठोर तने वाली विभिन्न प्रजातियों के पौधों को शामिल किया गया, जिससे आधुनिक नर्सरी विकास (Hydroponics Nursery Development) की तकनीकी समझ और मजबूत हो सके।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान पौधों के बेहतर विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से युक्त घोल तैयार करने और उसके समुचित उपयोग की जानकारी भी दी गई। प्रतिभागियों ने स्वयं हाइड्रोपोनिक्स की विभिन्न विधियों को अपनाकर सीखा।
विशेष रूप से ड्रिप इरिगेशन प्रणाली के महत्व पर जोर दिया गया, जिससे कम पानी में पौधों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराया जा सकता है और जल संरक्षण सुनिश्चित होता है। यह पहल आधुनिक नर्सरी विकास (Hydroponics Nursery Development) के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन की दिशा में भी अहम मानी जा रही है।
कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए हाइड्रोपोनिक इनडोर सजावटी पौधों को निगम द्वारा स्मृति-चिन्ह के रूप में वितरित किए जाने की योजना है। भविष्य में इन पौधों को बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है,
जिससे निगम को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी और टिकाऊ उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर प्रबंध संचालक प्रेम कुमार के मार्गदर्शन और दूरदर्शी सोच की सराहना की गई, जिनके निर्देश पर निगम के विभिन्न मंडलों में आधुनिक नर्सरी विकास (Hydroponics Nursery Development) को लेकर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
आगामी कार्ययोजना के तहत किचन गार्डन और टेरेस गार्डन को बढ़ावा देने के लिए परामर्श सेवाएं विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। कार्यशाला में निगम के विभिन्न मंडलों के अधिकारी और मैदानी कर्मचारी शामिल हुए,
जिन्होंने इस नई तकनीक में गहरी रुचि दिखाई। कुल मिलाकर यह तीन दिवसीय कार्यशाला नवाचार, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक लाभ की दिशा में छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की एक सराहनीय पहल के रूप में सामने आई है।


