छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 36 मजदूर झुलस गए हैं। हादसे में 4 मजदूरों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि अन्य की मौत इलाज के दौरान अलग-अलग अस्पतालों में हुई। कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, यह हादसा बॉयलर ब्लास्ट के बाद निकली अत्यधिक गर्म भाप की चपेट में आने से हुआ। भाप का तापमान 500 से 600 डिग्री सेल्सियस तक बताया जा रहा है, जिससे मजदूर बुरी तरह झुलस गए। कुछ मजदूरों के शरीर का 90 प्रतिशत हिस्सा तक जल चुका है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर के समय अचानक बॉयलर से तेज धुआं और भाप निकलने लगी। आसपास मौजूद मजदूर इसकी चपेट में आ गए और चीखते हुए भागने लगे। हादसे के समय कुछ मजदूर लंच के बाद बाहर निकले ही थे। तेज धमाके की आवाज सुनकर अन्य कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया।
हादसे में जान गंवाने वालों में कई बाहर के राज्यों के मजदूर शामिल हैं। एक मृतक की शादी 20 दिन पहले ही हुई थी और वह हाल ही में काम पर लौटा था। परिजनों को हादसे की जानकारी मिलने के बाद वे रातभर अस्पतालों में अपने लोगों की तलाश करते रहे।
घायलों का इलाज रायगढ़ और रायपुर के अस्पतालों में जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, कई मरीजों के फेफड़े भी प्रभावित हुए हैं, जिससे उनकी स्थिति बेहद नाजुक है।
सूत्रों के अनुसार, प्लांट में पिछले महीने भी दो हादसे हुए थे, जिसके बाद कुछ समय के लिए यूनिट को बंद किया गया था और सेफ्टी ट्रेनिंग की बात कही गई थी। बावजूद इसके, इतना बड़ा हादसा होना सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पावर प्लांट में बॉयलर अत्यधिक दबाव और तापमान पर काम करता है। यदि सेफ्टी सिस्टम फेल हो जाए तो भाप का रिसाव बेहद घातक साबित होता है, जिससे कुछ ही सेकंड में गंभीर जलन और मौत हो सकती है।


